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Environment – ग्रेट निकोबार परियोजना पर पारदर्शिता को लेकर कांग्रेस ने खड़े किए नए सवाल

Environment – ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय आकलन, निगरानी रिपोर्टों और विभिन्न अध्ययन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में पर्याप्त पारदर्शिता दिखाई नहीं दे रही है, जिससे पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।

पर्यावरणीय आकलन पर जताई चिंता

अपने हालिया पत्र में जयराम रमेश ने कहा कि परियोजना के लिए किए गए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई देते। उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर पहले भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक उठाए गए मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उनके अनुसार, परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं का व्यापक और स्पष्ट मूल्यांकन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिए ताकि सभी संबंधित पक्षों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।

अनुपालन रिपोर्टों की उपलब्धता पर सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के तहत नियमित अंतराल पर अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने का प्रावधान है। उन्होंने दावा किया कि मार्च 2024 के बाद ऐसी रिपोर्टें सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। साथ ही परियोजना निगरानी समिति की बैठकों से जुड़ी जानकारियां भी काफी देरी से साझा की जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े होते हैं।

संरक्षण और शमन योजनाओं को सार्वजनिक करने की मांग

पत्र में यह भी कहा गया है कि परियोजना के लिए तैयार की गई संरक्षण और शमन योजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रस्तुत किया जाना था। रमेश के अनुसार, विभिन्न वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थानों द्वारा तैयार की गई कई महत्वपूर्ण योजनाएं अभी तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि इन दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए तो परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकता है।

लंबित अध्ययनों का उठाया मुद्दा

जयराम रमेश ने दावा किया कि परियोजना से संबंधित कई अध्ययन अभी भी पूरे नहीं हुए हैं। उनके अनुसार, विभिन्न संस्थानों द्वारा किए जा रहे अनेक शोध और मूल्यांकन लंबित हैं, जबकि परियोजना को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि अद्यतन पर्यावरण प्रबंधन योजना और उससे जुड़े निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे परियोजना की तैयारी और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठते हैं।

प्रवाल भित्तियों और पारिस्थितिकी पर बहस

कांग्रेस का कहना है कि ग्रेट निकोबार क्षेत्र जैव विविधता और समुद्री पारिस्थितिकी की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। पार्टी ने आशंका जताई है कि प्रस्तावित विकास गतिविधियों का असर प्रवाल भित्तियों और स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ सकता है। जयराम रमेश ने कुछ शमन उपायों की व्यवहारिकता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पर्यावरणीय जोखिमों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

परियोजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी केंद्र सरकार की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने परियोजना के उद्देश्यों और इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए हैं। हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही और लोगों से इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

सरकार की योजना क्या है

ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, नागरिक एवं नौसैनिक उपयोग वाला हवाई अड्डा, टाउनशिप और बिजली उत्पादन सुविधाएं विकसित करने की योजना है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्रीय विकास, समुद्री व्यापार और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं, विपक्ष और पर्यावरण विशेषज्ञों का एक वर्ग इसके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर अधिक पारदर्शिता और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।

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