DigitalRights – आईटी नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब तलब…
DigitalRights- बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को 29 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में वर्ष 2025 में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 में किए गए संशोधनों और सरकार के ‘सहयोग पोर्टल’ की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। कामरा का कहना है कि इन प्रावधानों से ऑनलाइन सामग्री हटाने की प्रक्रिया को लेकर संवैधानिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है।

अदालत ने तय की अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ कर रही है। अदालत ने केंद्र सरकार को 29 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को सरकार के जवाब पर 6 अगस्त तक अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को दोपहर 3 बजे निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से क्या दलील दी गई
कुणाल कामरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सीरवाई ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार को पहले भी जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक आधिकारिक हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने दलील दी कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है, इसलिए इस पर समयबद्ध सुनवाई आवश्यक है।
केंद्र सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अधिक समय देने का अनुरोध किया। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से आपत्ति जताई गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने संतुलित रुख अपनाते हुए केंद्र को 29 जुलाई तक जवाब दाखिल करने की अंतिम समयसीमा तय कर दी।
याचिका में किन प्रावधानों को चुनौती
याचिका में कहा गया है कि संशोधित आईटी नियमों और ‘सहयोग पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को हटाने या ब्लॉक करने की प्रक्रिया में पर्याप्त कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे सोशल मीडिया और इंटरनेट पर प्रकाशित सामग्री को हटाने के लिए एक समानांतर व्यवस्था तैयार हो सकती है, जो मौजूदा कानूनी ढांचे से अलग है।
संवैधानिक और कानूनी पहलुओं का हवाला
याचिका में यह भी कहा गया है कि नए प्रावधान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत निर्धारित प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2015 के श्रेया सिंघल फैसले की भावना के अनुरूप नहीं हैं। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने उन प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है जिनके तहत राज्य सरकारों या उनके विभागों को भी ऑनलाइन सामग्री हटाने से संबंधित अधिकार दिए जाने का उल्लेख किया गया है। अब इस पूरे मामले में हाई कोर्ट केंद्र सरकार के विस्तृत जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की सुनवाई करेगा।