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Child Welfare Case – तेज हुई प्रार्थना केंद्र में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच

Child Welfare Case – केरल के पथानामथिट्टा जिले में स्थित एक प्रार्थना केंद्र से जुड़े मामले ने बाल संरक्षण एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया है। एक 17 वर्षीय किशोर द्वारा केंद्र के कुछ कर्मचारियों पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए जाने के बाद बाल कल्याण समिति (CWC) और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि केंद्र में रह रहे कुछ अन्य बच्चों ने भी कथित रूप से अनुचित व्यवहार और शारीरिक प्रताड़ना का सामना किया हो सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहराई से जांच की जा रही है और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब इडुक्की जिले के कट्टप्पना पुलिस थाने में एक किशोर की शिकायत के आधार पर प्रार्थना केंद्र के तीन कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि किशोर के साथ मारपीट की गई थी।

बताया गया है कि संबंधित किशोर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आता है और उसे शिक्षा में सहायता तथा भविष्य में रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर केंद्र में रखा गया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बाद में इसे आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित क्षेत्र के पुलिस थाने को सौंप दिया गया।

बाल कल्याण समिति ने की स्वतंत्र जांच

पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ पथानामथिट्टा की बाल कल्याण समिति ने भी मामले की अलग से जांच शुरू की। समिति की अध्यक्ष लीना के. सुभाष ने बताया कि आरोप सामने आने के बाद संबंधित केंद्र को बंद कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान समिति ने वहां रह रहे कई लोगों से बातचीत की। इनमें कुछ बुजुर्ग व्यक्ति भी शामिल थे। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि केंद्र में रहने वाले लोगों की स्थिति क्या थी और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।

बिना अनुमति रह रहे लोगों की जानकारी मिली

जांच के दौरान अधिकारियों को यह भी जानकारी मिली कि केंद्र में कुछ लोग आवश्यक अनुमति के बिना रह रहे थे। समिति ने वहां मौजूद एक बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, जिसके बारे में बताया गया कि उसका वहां रहना नियमों के अनुरूप नहीं था।

अधिकारियों के अनुसार, केंद्र में रहने वाले लोगों की संख्या और उनकी स्थिति से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। साथ ही उन व्यक्तियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है जो वहां लंबे समय से रह रहे थे।

बच्चों ने लगाए काम कराने और मारपीट के आरोप

बाल कल्याण समिति के अनुसार, कुछ बच्चों ने बयान में बताया कि उनके साथ मारपीट की गई थी। बच्चों ने यह भी दावा किया कि उनसे विभिन्न प्रकार के कार्य कराए जाते थे और उन्हें इसके बदले कोई भुगतान नहीं दिया जाता था।

समिति ने बताया कि बचाए गए बच्चों में से एक की चिकित्सकीय जांच कराई गई, जिसमें चोटों के संकेत मिले हैं। इन तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है और संबंधित एजेंसियां सभी पहलुओं की पुष्टि कर रही हैं।

शिक्षा और रोजगार के वादों की भी जांच

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ बच्चों को शिक्षा और रोजगार में मदद का भरोसा देकर केंद्र में रखा गया था। हालांकि, आरोप है कि उन्हें अपेक्षित शैक्षणिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।

अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि बच्चों को किन परिस्थितियों में केंद्र में लाया गया और वहां उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया। मामले में किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

आगे की जांच जारी

पुलिस और बाल कल्याण समिति दोनों इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

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