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CBIProbe – अरुणाचल मामले में कांग्रेस ने भाजपा और मुख्यमंत्री पर उठाए सवाल

CBIProbe – अरुणाचल प्रदेश में कथित ठेका आवंटन मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को प्रारंभिक जांच का निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने ऐसी स्थिति बनाए रखी है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू की भूमिका को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद

यह विवाद उस आदेश के बाद सामने आया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को सीबीआई को अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकों के आवंटन की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था। आरोपों में कहा गया है कि कुछ सरकारी ठेके ऐसी कंपनियों को दिए गए, जिनका संबंध मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से बताया गया है। अदालत ने मामले की प्रकृति को देखते हुए स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर बल दिया था।

कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच पर जताई चिंता

कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि जांच से जुड़े दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर मुख्यमंत्री का प्रभाव बना रहना उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के पास अभी भी उन विभागों का दायित्व है, जिनसे संबंधित अभिलेख जांच के दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है।

भाजपा पर मानदंडों की अनदेखी का आरोप

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि भाजपा ने इस मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक मर्यादाओं को नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने जांच का आदेश दिया है, तब सरकार को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए था जिससे किसी भी प्रकार के हितों के टकराव की आशंका न रहे। कांग्रेस का दावा है कि वर्तमान स्थिति न्यायिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं है।

मुख्यमंत्री को पद से हटाने की मांग फिर दोहराई

कांग्रेस ने एक बार फिर सवाल उठाया कि जांच संबंधी आदेश के बाद भी मुख्यमंत्री को जिम्मेदार पदों पर बनाए रखने का निर्णय क्यों लिया गया। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में उच्च मानकों का पालन किया जाना चाहिए। हालांकि राज्य सरकार या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

ठेकों के आवंटन को लेकर लगाए गए हैं आरोप

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि पिछले एक दशक के दौरान बड़ी राशि के सरकारी ठेके कथित तौर पर उन संस्थाओं को दिए गए जिनका संबंध मुख्यमंत्री के परिवार से बताया जाता है। इन आरोपों के आधार पर ही मामला अदालत तक पहुंचा था। हालांकि इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

अदालत ने स्वतंत्र जांच को बताया आवश्यक

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि जब मामला सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और उच्च स्तर पर संभावित हितों के टकराव से जुड़ा हो, तब जांच पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल निष्पक्ष जांच होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक रूप से निष्पक्ष दिखाई भी देनी चाहिए।

राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें जांच पर

मामला अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सीबीआई की प्रारंभिक जांच और उससे निकलने वाले निष्कर्षों पर आने वाले समय में सभी पक्षों की नजर रहेगी। फिलहाल कांग्रेस लगातार जवाबदेही की मांग कर रही है, जबकि मामले की जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

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