CAPF – ग्रेड पे विवाद में हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, इंस्पेक्टरों को मिली राहत
CAPF – केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कार्यरत उन अधिकारियों के पक्ष में दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो लंबे समय से उच्च ग्रेड पे के लाभ की मांग कर रहे थे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को न्यायालय के आदेश से कोई वित्तीय लाभ मिला है, तो समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को भी वही लाभ दिया जाना चाहिए। इसके लिए सभी को अलग-अलग अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

यह फैसला असम राइफल्स में सूबेदार पद पर तैनात नवीन कुमार की याचिका पर सुनाया गया। अदालत ने माना कि वह भी उसी श्रेणी के लाभ के पात्र हैं, जो पहले अन्य समान रैंक के अधिकारियों को प्रदान किए जा चुके हैं।
समान मामलों में एक जैसा लाभ देने पर जोर
दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि न्यायिक निर्णयों का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति को राहत देना नहीं होता, बल्कि समान परिस्थितियों वाले सभी कर्मचारियों के लिए न्याय सुनिश्चित करना भी होता है। अदालत ने केंद्र सरकार को सलाह दी कि ऐसे मामलों में योग्य कर्मचारियों को लाभ देने के लिए बार-बार मुकदमेबाजी का रास्ता न अपनाया जाए और नियमों के अनुसार स्वयं कार्रवाई की जाए।
न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकार से वंचित रखा जाता है और उसे न्याय पाने के लिए अदालत आने पर मजबूर किया जाता है, तो भविष्य में इस प्रकार के मामलों को गंभीरता से देखा जा सकता है।
चार सप्ताह में लाभ देने का निर्देश
अदालत ने अपने आदेश में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च ग्रेड पे का लाभ उपलब्ध कराया जाए। न्यायालय ने यह भी माना कि पूर्व में दिए गए निर्णयों के आधार पर नवीन कुमार समान वित्तीय उन्नयन के हकदार हैं।
क्या है पूरा ग्रेड पे विवाद
विवाद की जड़ केंद्र सरकार के एक पुराने प्रशासनिक आदेश से जुड़ी है। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित वेतनमान में चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को उच्च ग्रेड पे का लाभ दिया जाना था। विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में यह प्रावधान लागू किया गया, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में इसके क्रियान्वयन को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है।
इसी वजह से कई अधिकारियों और निरीक्षकों को अपने अधिकारों के लिए न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। उनका कहना रहा है कि समान वेतनमान और सेवा शर्तों के बावजूद उन्हें अन्य विभागों के कर्मचारियों जैसी सुविधा नहीं मिल रही है।
पहले भी अदालतों में मिल चुकी है राहत
इस मुद्दे पर इससे पहले भी कई मामलों में न्यायालय कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय दे चुका है। एक पूर्व मामले में आईटीबीपी के एक अधिकारी को उच्च ग्रेड पे और उससे जुड़े लाभ प्रदान किए गए थे। उस फैसले को चुनौती देने के लिए सरकार उच्चतम न्यायालय तक गई, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।
उसी निर्णय को आधार बनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्तमान मामले में भी समान दृष्टिकोण अपनाया और कहा कि एक बार कानूनी स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद समान मामलों में अलग रुख नहीं अपनाया जा सकता।
अन्य बलों के अधिकारी भी कर रहे हैं इंतजार
सीआरपीएफ, बीएसएफ और अन्य केंद्रीय बलों के कई अधिकारी भी इसी तरह के मामलों में न्यायिक राहत हासिल कर चुके हैं। हालांकि अनेक कर्मचारियों का दावा है कि अदालतों के आदेशों के बावजूद लाभ का वास्तविक क्रियान्वयन अभी भी लंबित है। इस कारण विभिन्न मंचों पर नई याचिकाएं और अवमानना से जुड़े मामले भी सामने आते रहे हैं।
फैसले का व्यापक असर संभव
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह निर्णय केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के उन हजारों कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जो समान परिस्थितियों में सेवा कर रहे हैं। यदि सरकार अदालत की भावना के अनुरूप व्यापक स्तर पर आदेश लागू करती है, तो बड़ी संख्या में पात्र कर्मियों को इसका लाभ मिल सकता है।