BRICS – वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर बोले अजीत डोभाल…
BRICS – नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखे। बैठक के दौरान उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य में बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया और विभिन्न देशों के बीच संवाद को मौजूदा चुनौतियों के समाधान के लिए अहम बताया।

अमेरिका-ईरान सहमति को बताया सकारात्मक संकेत
बैठक में अजीत डोभाल ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बनी सहमति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत इस घटनाक्रम को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता है और उम्मीद करता है कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी। उनके अनुसार, यदि यह समझौता प्रभावी ढंग से लागू होता है तो इसका लाभ केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर दिखाई देगा।
डोभाल ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके सुचारु संचालन से समुद्री परिवहन में आने वाली बाधाएं कम होंगी और कई देशों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा और व्यापार पर पड़ सकता है सकारात्मक प्रभाव
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है और किसी भी क्षेत्रीय तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की स्थिरता से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलती है। साथ ही खाद, रसायन और अन्य आवश्यक उत्पादों की उपलब्धता भी बेहतर होती है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही केवल आर्थिक हितों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय विकास के लिए भी जरूरी है। उनके अनुसार, स्थिर और सुरक्षित व्यापारिक वातावरण देशों की आर्थिक प्रगति को नई दिशा दे सकता है।
ब्रिक्स को बताया वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली मंच
अपने संबोधन में डोभाल ने ब्रिक्स समूह की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल पांच देशों का समूह नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी आबादी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे समय में जब दुनिया कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है, ब्रिक्स की जिम्मेदारी और महत्व दोनों बढ़ गए हैं।
उन्होंने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग आधी आबादी निवास करती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। डोभाल के अनुसार, यह मंच विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने और अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
आतंकवाद और साइबर खतरों पर जताई चिंता
बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के स्वरूप में लगातार बदलाव आ रहा है और इसके नए तरीके देशों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। इसके अलावा साइबर हमले और उन्नत तकनीकों के दुरुपयोग ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई कठिनाइयां खड़ी कर दी हैं।
डोभाल ने कहा कि इन खतरों से निपटने के लिए पारंपरिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय, सूचना साझा करने की व्यवस्था और आधुनिक रणनीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने सदस्य देशों से इन चुनौतियों के खिलाफ मिलकर काम करने का आह्वान किया।
सहयोग बढ़ाने पर भारत का जोर
बैठक में आतंकवाद विरोधी उपायों, तकनीकी सुरक्षा और वैश्विक शांति से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना है। डोभाल ने कहा कि भारत साझा सुरक्षा और स्थिरता के लिए सभी भागीदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संवाद, सहयोग और सामूहिक प्रयास ही स्थायी समाधान का रास्ता तैयार कर सकते हैं। ब्रिक्स मंच इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।