MissileDefense – अमेरिकी सुरक्षा ढांचे पर पेंटागन की चिंता, उजागर हुए नए खतरे…
MissileDefense – अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम और गंभीर संकेत सामने आया है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीनेट में बजट चर्चा के दौरान स्वीकार किया कि मौजूदा अमेरिकी रक्षा प्रणाली आधुनिक हथियारों, खासकर हाइपरसोनिक और उन्नत क्रूज मिसाइलों के सामने प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सैन्य तकनीक तेजी से बदल रही है और कई देश नई पीढ़ी के हथियार विकसित कर रहे हैं।

सीमित क्षमता वाली मौजूदा रक्षा प्रणाली
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान मिसाइल रक्षा ढांचा मुख्य रूप से छोटे पैमाने के हमलों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। यह जमीन आधारित एक-स्तरीय प्रणाली है, जिसकी क्षमता सीमित है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसे ऐसे समय में विकसित किया गया था जब खतरे का स्वरूप अलग था, लेकिन अब परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। आधुनिक युद्ध तकनीकों के सामने यह प्रणाली कई मामलों में अपर्याप्त मानी जा रही है।
आधुनिक हथियारों से बढ़ी चुनौती
सीनेट में दी गई जानकारी के मुताबिक, चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश तेजी से उन्नत मिसाइल तकनीक विकसित कर रहे हैं। खास तौर पर हाइपरसोनिक मिसाइलें, जो अत्यधिक गति और अनिश्चित मार्ग के कारण पारंपरिक रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम हैं, अमेरिका के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल ए गुएटलीन ने भी माना कि वर्तमान सुरक्षा स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही है।
‘गोल्डन डोम’ योजना पर बढ़ती उम्मीदें
इन चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिका एक नई और महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना ‘गोल्डन डोम’ पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत अंतरिक्ष आधारित सेंसर नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जो संभावित हमलों का पहले ही पता लगा सके। इसके साथ ही जमीन और समुद्र आधारित इंटरसेप्टर सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कमांड सिस्टम और नई तकनीकों जैसे लेजर हथियारों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 175 से 185 अरब डॉलर के बीच बताई जा रही है, और 2028 तक इसकी प्रारंभिक क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे अमेरिका की भविष्य की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
रक्षा उत्पादन में आई गिरावट
मिसाइल डिफेंस एजेंसी के निदेशक हीथ ए कोलिन्स ने एक और महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक सीमित निवेश के कारण रक्षा उत्पादन क्षमता कमजोर हुई है। इंटरसेप्टर मिसाइलों के निर्माण में कमी आई है और सप्लाई चेन को मजबूत करने में समय लगेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बड़े स्तर पर संघर्ष की स्थिति बनती है, तो लंबे समय तक रक्षा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
राजनीतिक स्तर पर बढ़ा विवाद
इस महंगी रक्षा परियोजना को लेकर अमेरिका के भीतर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ सांसदों ने इस पर सवाल उठाए हैं कि इतने बड़े बजट वाले कार्यक्रम में पारदर्शिता और निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी। उनका मानना है कि इस तरह की परियोजनाओं का राष्ट्रीय बजट पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, रक्षा अधिकारियों का तर्क है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में केवल पारंपरिक रणनीतियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। अब सुरक्षा के लिए केवल डर या प्रतिरोध की नीति नहीं, बल्कि सक्रिय रक्षा तंत्र विकसित करना जरूरी हो गया है।
मौजूदा सिस्टम पर अब भी निर्भरता
इन सभी चुनौतियों और नई योजनाओं के बावजूद अमेरिका फिलहाल अपने मौजूदा रक्षा ढांचे पर ही निर्भर है। इसमें एजिस सिस्टम से लैस नौसैनिक जहाज, थाड और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। ये सभी मिलकर एक बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था बनाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के जटिल और उच्च तकनीक वाले खतरों के सामने यह पर्याप्त साबित नहीं हो सकती।