Canada China Relations 2026: चीन पहुंचे मार्क कार्नी और बीजिंग ने अमेरिका के खिलाफ बिछाई बिसात
Canada China Relations 2026: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के चीन पहुंचते ही दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। कई सालों के लंबे इंतजार और कड़वाहट के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री का यह चीन दौरा वैश्विक शक्ति संतुलन के बदलने का स्पष्ट संकेत है। इस (Diplomatic Rapprochement) को देखते हुए राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि बीजिंग अब इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता। चीन की कोशिश है कि वह कनाडा के साथ अपने पुराने रिश्तों की बर्फ पिघलाकर उसे वैश्विक मंच पर एक नया मोड़ दे सके।

चीन ने दी कनाडा को रणनीतिक स्वायत्तता की नसीहत
बीजिंग में मार्क कार्नी का स्वागत केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चीनी सरकारी मीडिया ने तुरंत अपने सुर तेज कर दिए। चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली ने संपादकीय के जरिए कनाडा को अपनी (Strategic Autonomy) बनाए रखने की सलाह दी है। चीन का सीधा तर्क है कि यदि कनाडा अपनी विदेश नीति को अमेरिका के चश्मे से देखना बंद कर दे, तो दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की गुंजाइश काफी बढ़ जाएगी। चीन चाहता है कि कनाडा अपने फैसले स्वतंत्र रूप से ले।
वॉशिंगटन की मर्जी और ओटावा की मजबूरी
चीनी मीडिया ने बहुत ही तीखे शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि यदि ओटावा भविष्य में भी अपनी चीन नीति को वॉशिंगटन के इशारों पर चलाता रहा, तो वर्तमान सुधार की कोशिशें बेमानी हो जाएंगी। वहां के (Geopolitical Strategy) जानकारों का कहना है कि कनाडा को पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में आई गिरावट के मूल कारणों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। चीन का मानना है कि अमेरिका के दबाव में आकर कनाडा ने अपनी छवि और व्यापारिक हितों को काफी नुकसान पहुंचाया है।
ग्लोबल टाइम्स का कनाडा के बदलते रुख पर तंज
चीन के एक अन्य प्रभावशाली अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी कनाडा के इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अखबार ने लिखा है कि चीन पर भारी टैरिफ लगाने और अमेरिका का आंख मूंदकर समर्थन करने के बाद अब शायद कनाडा की समझ जाग रही है। इस (Foreign Policy Shift) के जरिए चीन यह संदेश देना चाहता है कि अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने उसके अपने सहयोगियों को ही असुरक्षित महसूस कराना शुरू कर दिया है। चीन अब कनाडा की इसी असुरक्षा और जरूरत को भुनाने की ताक में बैठा है।
ट्रंप की आक्रामक नीति और अमेरिका-कनाडा के बीच तल्खी
कनाडा और चीन के बीच बढ़ती इस नजदीकी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां एक बड़ा कारण मानी जा रही हैं। ट्रंप की ‘टैरिफ वॉर’ और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसे बयानों ने (North American Alliances) में एक गहरी दरार पैदा कर दी है। जो बाइडन के समय में जिस चीन विरोधी गठबंधन की नींव रखी गई थी, ट्रंप के दौर में वह बिखरता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिका के इसी बदलते व्यवहार ने चीन को कनाडा के करीब आने का एक सुनहरा अवसर प्रदान कर दिया है।
टैरिफ की दीवार और व्यापारिक मजबूती की उम्मीद
कनाडा के अधिकारियों ने इस यात्रा के दौरान व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक कारों पर लगे भारी टैरिफ को लेकर सस्पेंस बरकरार है। पूर्ववर्ती जस्टिन ट्रुडो सरकार के दौरान अमेरिका के प्रभाव में कनाडा ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 फीसदी (Trade Tariff Negotiation) का कड़ा फैसला लिया था। अब मार्क कार्नी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे चीन के साथ व्यापारिक संतुलन कैसे बनाते हैं और क्या वे उन प्रतिबंधों में ढील देने के लिए तैयार होंगे।
जस्टिन ट्रुडो युग की कड़वाहट को भुलाने की कोशिश
जस्टिन ट्रुडो के कार्यकाल के दौरान कनाडा और चीन के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। जासूसी के आरोपों और राजनयिकों के निष्कासन ने दोनों देशों के बीच बातचीत के सारे रास्ते लगभग बंद कर दिए थे। अब (Economic Partnership) को प्राथमिकता देते हुए मार्क कार्नी इन रिश्तों को फिर से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं। कनाडा अब यह समझ चुका है कि वह पूरी तरह से अमेरिकी बाजार और उसकी सनक पर निर्भर नहीं रह सकता, उसे नए विकल्पों की तलाश करनी ही होगी।
नए बाजारों की तलाश और अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कवायद
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का यह चीन दौरा पूरी तरह से ‘बिजनेस ओरिएंटेड’ नजर आ रहा है। कनाडा अब अमेरिका से इतर अपने उत्पादों के लिए नए और विशाल बाजार ढूंढ रहा है ताकि अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर कर सके। यह (Global Market Diversification) रणनीति न केवल कनाडा के आर्थिक भविष्य के लिए जरूरी है, बल्कि यह उसे अमेरिका के भू-राजनीतिक दबाव से भी मुक्त कराएगी। बीजिंग और ओटावा के बीच बढ़ती यह दोस्ती वाशिंगटन के लिए निश्चित रूप से चिंता का विषय बनने वाली है।
रणनीतिक संतुलन और वैश्विक राजनीति का नया चेहरा
अंततः, मार्क कार्नी की यह चीन यात्रा केवल दो देशों का मिलन नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि अब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। यदि कनाडा और चीन अपने (Bilateral Relations Improvement) में सफल रहते हैं, तो यह अमेरिका के प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कनाडा अमेरिका का सबसे करीबी दोस्त बने रहकर चीन के साथ अपनी नई साझेदारी को सफलतापूर्वक निभा पाएगा।



