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OscarsTribute – धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि न मिलने पर सामने आई सफाई, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

OscarsTribute – ऑस्कर अवॉर्ड्स के 98वें संस्करण में दिवंगत कलाकारों को दी जाने वाली श्रद्धांजलि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार ‘इन मेमोरियम’ सेगमेंट में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का नाम शामिल नहीं किया गया, जिस पर उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत के कई लोगों ने नाराजगी जताई। इस मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा बटोरी, जिसके बाद अब आयोजकों की ओर से सफाई सामने आई है।

चयन प्रक्रिया को लेकर दी गई जानकारी

ऑस्कर समारोह के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर रॉब मिल्स ने एक इंटरव्यू में बताया कि श्रद्धांजलि के लिए नामों का चयन एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित कलाकारों का निधन होता है, ऐसे में सीमित समय के कारण सभी नामों को शामिल करना संभव नहीं हो पाता। इसी वजह से कुछ नाम छूट जाते हैं, जो अनजाने में होता है।

हेमा मालिनी ने जताई नाराजगी

इस मामले पर अभिनेत्री और धर्मेंद्र की पत्नी हेमा मालिनी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकार को नजरअंदाज किया जाना निराशाजनक है। उनके अनुसार, धर्मेंद्र न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी एक पहचान रखते थे और उनके योगदान को इस तरह अनदेखा करना सही नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें और धर्मेंद्र को अपने देश से मिले प्यार पर गर्व है।

अन्य कलाकारों के नाम भी नहीं हुए शामिल

यह विवाद केवल धर्मेंद्र तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सूची में कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के नाम भी शामिल नहीं किए गए। इससे यह सवाल और गहरा हो गया कि चयन प्रक्रिया में किन मानकों को प्राथमिकता दी जाती है और किन्हें बाहर रखा जाता है।

फैंस और इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे एक बड़ी चूक बताया, जबकि कुछ ने आयोजन की सीमाओं को ध्यान में रखने की बात कही। फिल्म जगत से जुड़े कई लोगों ने भी इस पर अपनी राय दी और श्रद्धांजलि प्रक्रिया में अधिक समावेशिता की मांग की।

सम्मान और पहचान पर बहस

यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि वैश्विक मंचों पर कलाकारों को सम्मान देने के मानदंड क्या होने चाहिए। क्या लोकप्रियता, योगदान या अंतरराष्ट्रीय पहचान—इनमें से किसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए, इस पर बहस तेज हो गई है।

आगे सुधार की उम्मीद

आयोजकों की सफाई के बावजूद यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समावेशी बनाया जाएगा, ताकि किसी भी प्रमुख कलाकार को नजरअंदाज न किया जाए।

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