अंतर्राष्ट्रीय

Diplomacy – इस्राइल और लेबनान के बीच मई में होगी नई शांति वार्ता

Diplomacy – अमेरिका की मध्यस्थता में इस्राइल और लेबनान के बीच अगले दौर की अहम बातचीत 14 और 15 मई को आयोजित की जाएगी। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधि क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद और स्थायी शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस वार्ता में हिजबुल्लाह से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं भी प्रमुख विषय रहेंगी। वॉशिंगटन का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद लंबे समय से जारी तनाव को कम करना और दोनों देशों के बीच स्थिर संबंधों की दिशा में आगे बढ़ना है।

अप्रैल की बैठक के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस टॉमी पिगॉट ने बताया कि मई में होने वाली यह बातचीत पिछले महीने 23 अप्रैल को हुई बैठक का अगला चरण होगी। उस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भाग लिया था। अमेरिका इस पूरे संवाद में समन्वयक की भूमिका निभाएगा और दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा।

विदेश विभाग के मुताबिक, चर्चा के दौरान सीमाओं के निर्धारण, सुरक्षा व्यवस्था और लेबनान के लिए मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि पिछले कई वर्षों में अपनाई गई नीतियां क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने में सफल नहीं रहीं, जिसके कारण उग्रवादी संगठनों का प्रभाव बढ़ता गया।

हिजबुल्लाह को लेकर अमेरिका की सख्त राय

अमेरिका ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि लेबनान में स्थिरता तभी संभव है जब सरकार का पूरे देश पर प्रभावी नियंत्रण हो। अमेरिकी प्रशासन हिजबुल्लाह को विदेशी आतंकी संगठन मानता है और उसका कहना है कि इस समूह की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती रही हैं।

विदेश विभाग के अनुसार, लेबनान की संप्रभुता मजबूत करने और इस्राइल की उत्तरी सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि हथियारबंद गुटों की गतिविधियों पर रोक लगे। अमेरिका का कहना है कि नई बातचीत का उद्देश्य केवल संघर्ष विराम तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक शांति व्यवस्था तैयार करना भी है।

संघर्ष विराम बढ़ाने के बाद तेज हुई पहल

पिछले महीने अमेरिका ने इस्राइल और लेबनान के बीच लागू संघर्ष विराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा की थी। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की उस बैठक के बाद लिया गया जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और दोनों देशों में तैनात अमेरिकी राजदूत शामिल हुए थे। बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी थी कि युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए आगे बढ़ाया गया है।

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा हालात में बातचीत ही तनाव कम करने का सबसे प्रभावी रास्ता है। हालांकि, क्षेत्र में लगातार हो रही सैन्य गतिविधियों के कारण यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

क्षेत्रीय हालात को लेकर बनी हुई है चिंता

विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में कहा था कि इस्राइल और लेबनान के बीच शांति समझौते की संभावना मौजूद है, लेकिन जमीनी हालात इसे कठिन बनाते हैं। उनके अनुसार, हिजबुल्लाह की गतिविधियां इस दिशा में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन लेबनान की जमीन का इस्तेमाल इस्राइल पर हमलों के लिए करता है, जिसका असर आम नागरिकों पर भी पड़ता है।

इस समय दक्षिण लेबनान में इस्राइली सैन्य कार्रवाई और उत्तरी इलाकों में हिजबुल्लाह की जवाबी गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में आगामी वार्ता को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

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