स्वास्थ्य

VitaminB12 – शरीर में पोषक तत्वों की कमी बढ़ा रही कई स्वास्थ्य समस्याएं

VitaminB12 – देश में पोषण से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ती चिंता का विषय बनती जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार की कमी और बदलती खानपान की आदतों के कारण बड़ी संख्या में लोग जरूरी पोषक तत्वों से वंचित रह रहे हैं। हाल के कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि विटामिन बी12 और फोलेट की कमी भारतीय आबादी के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही है। डॉक्टरों के मुताबिक इन पोषक तत्वों की कमी का असर सिर्फ शारीरिक कमजोरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी परेशानियों का कारण भी बन सकता है।

विटामिन बी12 की कमी क्यों बन रही बड़ी समस्या

विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन बी12 शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, नसों की कार्यप्रणाली और डीएनए निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगर लंबे समय तक शरीर में इसकी कमी बनी रहे तो एनीमिया, नर्व संबंधी दिक्कतें और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक देश की लगभग आधी आबादी किसी न किसी स्तर पर विटामिन बी12 की कमी से प्रभावित हो सकती है।

खानपान की आदतों का भी दिख रहा असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर स्वयं विटामिन बी12 नहीं बनाता, इसलिए इसकी पूर्ति भोजन के जरिए ही करनी पड़ती है। यह पोषक तत्व मुख्य रूप से दूध, दही, अंडा, मछली और अन्य पशु आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। इसी वजह से लंबे समय तक पूरी तरह शाकाहारी भोजन लेने वाले लोगों में इसकी कमी अधिक देखी जाती है। डॉक्टर यह भी बताते हैं कि अनियमित खानपान और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन भी शरीर में जरूरी न्यूट्रिशन की कमी को बढ़ा सकता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन बी12 और फोलेट की कमी के शुरुआती संकेत अक्सर सामान्य थकान की तरह महसूस होते हैं। लगातार कमजोरी, चक्कर आना, हाथ-पैरों में झनझनाहट, भूलने की समस्या और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। कुछ मामलों में मानसिक तनाव और अवसाद जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक इन संकेतों को अनदेखा करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

बुजुर्गों और मरीजों में बढ़ सकता है जोखिम

स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ शरीर में विटामिन बी12 का अवशोषण कम होने लगता है। इसी कारण बुजुर्गों में इसकी कमी ज्यादा देखी जाती है। इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों में लंबे समय तक कुछ दवाओं का उपयोग भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे लोगों को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए ताकि पोषक तत्वों की कमी का समय रहते पता लगाया जा सके।

संतुलित आहार और जांच को बताया जरूरी

डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित भोजन और नियमित हेल्थ चेकअप के जरिए विटामिन बी12 और फोलेट की कमी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। आहार में दूध, दही, हरी सब्जियां, दालें और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक समय रहते पोषण संबंधी कमियों पर ध्यान देना भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है।

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