स्वास्थ्य

ObesityStudy – लैंसेट रिपोर्ट में 925 संक्रमणों का बढ़ा खतरा

ObesityStudy – देश ही नहीं, दुनिया भर में बढ़ता मोटापा अब केवल जीवनशैली की समस्या नहीं रह गया है। हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक विस्तृत अध्ययन ने मोटापे को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। फिनलैंड और ब्रिटेन के करीब 5.4 लाख लोगों के आंकड़ों पर आधारित इस शोध में पाया गया कि अधिक वजन केवल हृदय रोग या डायबिटीज तक सीमित खतरा नहीं बढ़ाता, बल्कि 925 प्रकार के गंभीर संक्रमणों की आशंका भी बढ़ा सकता है।

प्रतिरक्षा तंत्र पर गहरा प्रभाव

शोधकर्ताओं के अनुसार, शरीर में अतिरिक्त चर्बी केवल बाहरी बदलाव नहीं लाती, बल्कि अंदरूनी प्रणाली को भी प्रभावित करती है। मोटापे की स्थिति में शरीर लगातार सूजन की अवस्था में रहता है, जिसे क्रॉनिक इंफ्लेमेशन कहा जाता है। यह स्थिति प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर देती है।

जब इम्युनिटी सुस्त पड़ती है तो बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जैसे सूक्ष्म जीवों से लड़ने की क्षमता घट जाती है। अध्ययन में संकेत मिला है कि सामान्य परिस्थितियों में मामूली दिखने वाले संक्रमण भी मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति के लिए गंभीर साबित हो सकते हैं।

फेफड़ों और रक्त संचार पर असर

रिपोर्ट के अनुसार, वजन बढ़ने का सीधा प्रभाव श्वसन तंत्र पर पड़ता है। अधिक वसा फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, जिससे सांस लेने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी नहीं रह पाती।

इस स्थिति में निमोनिया और इन्फ्लुएंजा जैसे संक्रमणों का जोखिम बढ़ जाता है। ऑक्सीजन का समुचित प्रवाह बाधित होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और कमजोर हो सकती है। शोध में यह भी पाया गया कि रक्त प्रवाह पर अतिरिक्त दबाव संक्रमण की गंभीरता को बढ़ा सकता है।

बैक्टीरियल संक्रमण का बढ़ता खतरा

अध्ययन में यह भी सामने आया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में सेप्सिस जैसे खतरनाक संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक होता है। सेप्सिस तब होता है जब संक्रमण खून में फैल जाता है और कई अंगों को प्रभावित कर सकता है।

त्वचा और कोमल ऊतकों में होने वाले संक्रमण भी अधिक वजन वाले लोगों में ज्यादा देखे गए। शोधकर्ताओं का मानना है कि मोटापा कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है, जिससे बैक्टीरिया को पनपने का अवसर मिलता है।

मेटाबॉलिक असंतुलन और अन्य जोखिम

अधिक वजन के कारण शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया में गड़बड़ी आती है। यह असंतुलन मूत्र मार्ग संक्रमण जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ा सकता है।

जब शरीर लगातार सूजन की स्थिति में रहता है, तो वह संक्रमण से लड़ने के बजाय उनके प्रसार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देता है। यही कारण है कि साधारण संक्रमण भी जटिल रूप ले सकते हैं।

वैक्सीन प्रभावशीलता पर भी असर

अध्ययन की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि मोटापा वैक्सीन की प्रभावशीलता को भी प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जब शरीर प्रो-इंफ्लेमेटरी अवस्था में होता है, तो टीकाकरण का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है।

बचाव के लिए क्या जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे को केवल सौंदर्य से जुड़ी समस्या न मानकर एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के रूप में देखना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय परामर्श इसके नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं।

समय रहते वजन पर नियंत्रण रखने से न केवल पुरानी बीमारियों से बचाव संभव है, बल्कि संक्रमण के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह अध्ययन एक चेतावनी की तरह है कि स्वस्थ जीवनशैली अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।

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