BiharCabinet – आखिरी बैठक के बाद मंत्रिपरिषद भंग करने की औपचारिकता पूरी
BiharCabinet – बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक पूरी कर ली है। बैठक के बादवे मुख्य सचिवालय के पोर्टिको में कुछ समय तक मंत्रियों से अनौपचारिक बातचीत करते नजर आए और फिर सीधे अपने आधिकारिक आवास के लिए रवाना हो गए। इस बैठक को लेकर पहले से ही अटकलें थीं, लेकिन अंततः यह बैठक औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित रही।

औपचारिक चर्चा तक सीमित रही बैठक
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य रूप से मंत्रिपरिषद को भंग करने के मुद्दे पर औपचारिक चर्चा की गई। किसी नए प्रस्ताव या नीतिगत फैसले पर विचार नहीं हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि बैठक के बाद आमतौर पर आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी रद्द कर दिया गया, जिससे यह साफ संकेत मिला कि सरकार अब संक्रमण के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
काफी समय बाद बुलाई गई बैठक
इससे पहले 20 फरवरी के बाद कोई कैबिनेट बैठक नहीं हुई थी। ऐसे में यह बैठक काफी अंतराल के बाद आयोजित की गई, लेकिन इसमें भी कोई बड़ा निर्णय सामने नहीं आया। इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जो नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप जरूरी था।
पिछली बैठक में लिए गए अहम फैसले
20 फरवरी को हुई पिछली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। इनमें सोनपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का फैसला प्रमुख था। करीब 42 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को राज्य के विकास के लिए अहम कदम माना गया था।
नई सरकार के बाद कैबिनेट बैठकों की झलक
नई सरकार के गठन के बाद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुल सात कैबिनेट बैठकें कीं। इन बैठकों में रोजगार, बुनियादी ढांचा और सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। पहली बैठक में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने का निर्णय लिया गया था, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में पहल हुई।
दूसरी बैठक में सरकार ने रोजगार सृजन के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए नए विभागों के गठन को मंजूरी दी और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि का फैसला लिया। इसके बाद की बैठकों में ‘सात निश्चय योजना 3.0’ को स्वीकृति मिली, जिसमें आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर दोगुने करने पर जोर दिया गया।
विभिन्न क्षेत्रों में विकास योजनाओं को मिली मंजूरी
सरकार ने कृषि, डेयरी, मत्स्य और पशुपालन क्षेत्रों में नए पदों के सृजन को मंजूरी दी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रयास किया गया। इसके अलावा मुंबई में बिहार भवन निर्माण जैसी परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई, जो राज्य के बाहरी संपर्क और पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
छात्रों और युवाओं के लिए योजनाएं
कैबिनेट बैठकों में शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रावास अनुदान योजना में संशोधन करते हुए मासिक सहायता राशि बढ़ाई गई। साथ ही मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार किया गया, ताकि उन्हें बेहतर अवसर मिल सकें।
राजनीतिक बदलाव के संकेत
आखिरी कैबिनेट बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य की राजनीति में जल्द ही नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर आगे की प्रक्रिया को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन घटनाक्रम से संकेत मिलते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर नई शुरुआत की तैयारी चल रही है।



