Hypertension – जीवनशैली में छोटे बदलाव से कैसे काबू में आ सकता है हाई ब्लड प्रेशर
Hypertension – हाई ब्लड प्रेशर, जिसे चिकित्सकीय भाषा में हाइपरटेंशन कहा जाता है, आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी की एक गंभीर लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली समस्या बन चुका है। इसे ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर यह दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।

फिटनेस और वेलनेस विशेषज्ञ डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी के अनुसार, अधिकांश मामलों में हाई बीपी की जड़ हमारी रोजमर्रा की आदतों में छिपी होती है। असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव धीरे-धीरे शरीर के सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। उनका कहना है कि कुछ व्यावहारिक और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर केवल दो हफ्तों में ब्लड प्रेशर के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
नमक की मात्रा पर सख्त नियंत्रण जरूरी
ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने की दिशा में पहला और सबसे अहम कदम है नमक का सीमित सेवन। डॉक्टर शालिनी बताती हैं कि रोजाना पांच ग्राम से कम नमक लेना हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। समस्या यह है कि आज के खानपान में छिपा हुआ नमक बहुत अधिक होता है। चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड्स में सोडियम की मात्रा जरूरत से कहीं ज्यादा होती है। इनका नियमित सेवन धमनियों पर दबाव बढ़ाता है, जिससे बीपी तेजी से ऊपर जाता है। घर के बने ताजे भोजन को प्राथमिकता देकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पोटैशियम युक्त आहार से मिलता है संतुलन
नमक कम करने के साथ-साथ शरीर में पोटैशियम की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। पोटैशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित करता है और अतिरिक्त नमक को बाहर निकालने में मदद करता है। केला, संतरा, नारियल पानी, पालक, टमाटर और शकरकंद जैसे खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, नियमित रूप से पोटैशियम युक्त भोजन लेने से रक्त वाहिकाओं को आराम मिलता है और ब्लड प्रेशर स्वाभाविक रूप से नियंत्रित रहता है।
सेडेंटरी लाइफस्टाइल से दूरी बनाना है जरूरी
लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी आज हाई बीपी की बड़ी वजह बन चुकी है। डॉक्टर शालिनी का कहना है कि रोजाना 30 से 45 मिनट की वॉक, हल्की जॉगिंग या कोई भी पसंदीदा एक्सरसाइज दिल को मजबूत बनाती है। जब शरीर सक्रिय रहता है, तो हृदय अधिक कुशलता से रक्त पंप करता है और धमनियों का लचीलापन बना रहता है। इसका सीधा असर सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों प्रेशर पर पड़ता है। नियमित व्यायाम न केवल बीपी घटाता है, बल्कि वजन नियंत्रण और ऊर्जा स्तर बढ़ाने में भी मदद करता है।
तनाव को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
मानसिक तनाव का सीधा संबंध ब्लड प्रेशर से होता है। तनाव की स्थिति में शरीर स्ट्रेस हार्मोन रिलीज करता है, जिससे बीपी अचानक बढ़ सकता है। डॉक्टर शालिनी के मुताबिक, रोजाना कुछ मिनट खुद के लिए निकालना बेहद जरूरी है। गहरी सांस लेने की तकनीक, ध्यान, योग या शांत वातावरण में टहलना नसों को शांत करता है और कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है। तनाव पर नियंत्रण रखने से न सिर्फ बीपी बेहतर होता है, बल्कि नींद और मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार आता है।
पर्याप्त नींद और सही हाइड्रेशन भी अहम
अक्सर लोग बीपी नियंत्रण में नींद और पानी की भूमिका को नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद शरीर के हार्मोन संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। वहीं, पर्याप्त पानी पीने से रक्त का प्रवाह बेहतर रहता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। अनियमित नींद और डिहाइड्रेशन दोनों ही ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले कारक माने जाते हैं।
डॉक्टर शालिनी का मानना है कि दवाइयों के साथ या बिना दवाइयों के, यदि इन सरल नियमों को नियमित रूप से अपनाया जाए, तो ब्लड प्रेशर को सामान्य स्तर पर लाना संभव है। जीवनशैली में किए गए ये छोटे बदलाव भविष्य में होने वाली बड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाव का प्रभावी तरीका साबित हो सकते हैं।