Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi 2: क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 में नया मोड़, बदले की आग में अपनों के ही खिलाफ खड़ा हुआ गौतम
Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi 2: मशहूर टेलीविजन धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ इन दिनों अपने हाई-वोल्टेज ड्रामे के कारण दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आया जब विरानी परिवार के वारिस गौतम विरानी की घर में वापसी हुई। हालांकि, यह वापसी वैसी नहीं थी जैसी तुलसी और मिहिर ने कल्पना की थी। गौतम अपने परिवार के साथ खड़ा होने के बजाय उनके खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। उसके मन में अपने माता-पिता के प्रति बदले की गहरी भावना है, और इसी नफरत की आग में वह अपनी ही बहन परिधि (परी) की मुश्किलों को बढ़ाने का काम कर रहा है।

रणविजय का ढाल बना गौतम, विरानी परिवार के उड़े होश
सीरियल के मौजूदा ट्रैक में दिखाया गया है कि रणविजय का असली चेहरा सबके सामने आ चुका है। वह अपनी पत्नी परी को न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था, बल्कि उसने उसे जान से मारने की कोशिश भी की। इस जुल्म से तंग आकर परी ने रणविजय से अलग होने और तलाक लेने का साहसी फैसला किया। मामला अब अदालत की दहलीज पर है, जहां परी की पैरवी उसके चाचा हेमंत कर रहे हैं। विरानी परिवार को तब सबसे बड़ा झटका लगा जब उन्हें पता चला कि रणविजय की तरफ से केस कोई और नहीं, बल्कि उनका अपना खून गौतम विरानी लड़ रहा है।
अदालत के गलियारे में मां और बेटे का भावनात्मक टकराव
तुलसी अपने बेटे गौतम को सही रास्ते पर लाने और परिवार की गरिमा बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है। वह गौतम से मिलकर उसे समझाने का प्रयास करती है, लेकिन गौतम अपनी मां से मिलने तक से इनकार कर देता है। आखिरकार, अदालत में जब दोनों का आमना-सामना होता है, तो तुलसी भावुक हो जाती है। अपने बेटे को एक अपराधी का साथ देते देख उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। तुलसी उससे बार-बार पूछती है कि वह अपनी बहन के खिलाफ क्यों खड़ा है, लेकिन पेशे से वकील गौतम पर इन भावनाओं का कोई असर नहीं होता। वह दो टूक शब्दों में कह देता है कि वह यहां सिर्फ एक वकील की हैसियत से आया है।
कटघरे में मां को खड़ा कर गौतम ने पूछे कड़वे सवाल
गौतम के मन में अपने परिवार को लेकर काफी कड़वाहट भरी हुई है। उसका मानना है कि विरानी परिवार ने उसे कभी वह हक और सम्मान नहीं दिया, जिसका वह हकदार था। वह अपनी मां तुलसी से साफ कहता है कि वह रणविजय को उसका हक दिलाकर रहेगा और यह केस हर हाल में जीतेगा। सुनवाई के दौरान माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब गौतम ने अपनी बहन परी और फिर खुद तुलसी विरानी को कटघरे में बुला लिया। गौतम ने जिरह के दौरान अपनी मां से ऐसे तीखे और व्यक्तिगत सवाल किए कि तुलसी के पास कोई जवाब नहीं था और उसे शर्मिंदगी से सिर झुकाना पड़ा।
क्या तुलसी बचा पाएगी बिखरते रिश्तों की डोर?
गौतम की इस बेरुखी और आक्रामक तेवरों ने पूरे विरानी परिवार को सन्न कर दिया है। वह बदले की आग में इतना अंधा हो चुका है कि उसे अपनी बहन की तकलीफ भी नजर नहीं आ रही है। अब दर्शकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गौतम अपनी नफरत में परी की जिंदगी बर्बाद कर देगा? या फिर तुलसी अपनी ममता और बुद्धिमानी से अपने बेटे के दिल में जमी बर्फ को पिघला पाएगी? आने वाले एपिसोड्स में यह देखना दिलचस्प होगा कि तुलसी अपने बेटे के इन हमलों का सामना कैसे करती है और क्या वह रणविजय को सजा दिलवा पाएगी।



