Kahaani2 – कॉपीराइट विवाद में सुजॉय घोष को सुप्रीम कोर्ट से राहत
Kahaani2 – फिल्म ‘कहानी 2’ से जुड़े कथित कॉपीराइट उल्लंघन मामले में निर्देशक सुजॉय घोष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने झारखंड की एक अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। शुक्रवार को दिए गए इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। इससे लंबे समय से चल रहे इस विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है।

याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे शामिल थे, ने सुजॉय घोष की याचिका को स्वीकार करते हुए निचली अदालत और झारखंड हाई कोर्ट के आदेशों को निरस्त कर दिया। अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 7 जून 2018 को जारी समन और 22 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया। इस फैसले के साथ ही घोष के खिलाफ चल रही पूरी प्रक्रिया समाप्त हो गई।
हाई कोर्ट ने पहले दी थी राहत से इनकार
इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने सुजॉय घोष की याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट का कहना था कि इस स्तर पर मामले को रद्द करना उचित नहीं होगा और यह एक तरह का ‘मिनी ट्रायल’ हो जाएगा। अदालत ने यह भी कहा था कि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच ट्रायल के दौरान की जानी चाहिए। इसी फैसले को चुनौती देते हुए घोष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
मामले की पृष्ठभूमि क्या थी
यह विवाद एक शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ‘कहानी 2’ की कहानी किसी अन्य स्क्रिप्ट से मिलती-जुलती है। शिकायतकर्ता उमेश प्रसाद मेहता का दावा था कि उन्होंने ‘सबक’ नाम से एक स्क्रिप्ट तैयार की थी और उसका कॉपीराइट भी दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि सुजॉय घोष ने किसी तरह उस स्क्रिप्ट की प्रति हासिल की और बाद में उसी के आधार पर फिल्म बनाई।
आरोपों को लेकर उठे थे सवाल
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया था कि उनकी मुलाकात घोष से हुई थी और इस दौरान स्क्रिप्ट से जुड़ी जानकारी साझा की गई थी। बाद में जब उन्होंने ‘कहानी 2’ देखी, तो उन्हें लगा कि उनकी कहानी का उपयोग किया गया है। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अदालत में विभिन्न स्तरों पर बहस हुई और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने इन दावों को आगे बढ़ाने योग्य नहीं माना।
फैसले के व्यापक मायने
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को फिल्म उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह कॉपीराइट से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की सीमाओं और मानकों को स्पष्ट करता है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि किसी भी आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए ठोस आधार होना जरूरी है। इस फैसले के बाद ‘कहानी 2’ से जुड़ा यह विवाद कानूनी रूप से समाप्त हो गया है।