बिज़नेस

Wealth Inequality – मस्क की बढ़ती दौलत के बीच दुनिया में गहराता आर्थिक अंतर

Wealth Inequality – एलन मस्क की संपत्ति में बीते कुछ वर्षों में हुई तेज बढ़ोतरी के साथ दुनिया में अमीर और गरीब के बीच आर्थिक अंतर को लेकर बहस भी तेज हुई है। ऑक्सफैम के आंकड़ों के मुताबिक 2015 से 2025 के बीच दुनिया के सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों की संपत्ति में 34 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, अत्यधिक गरीबी में रहने वाली आबादी में कमी उस रफ्तार से नहीं आई, जिसकी लंबे समय से उम्मीद की जाती रही है। यही विरोधाभास अब इस सवाल को मजबूती दे रहा है कि क्या मौजूदा आर्थिक विकास का मॉडल समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से लाभ पहुंचा पा रहा है।

एक दशक में मस्क की संपत्ति में आया बड़ा उछाल

फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2020 में एलन मस्क की कुल संपत्ति करीब 28 अरब डॉलर आंकी गई थी और उस समय वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 35वें स्थान पर थे। इसके बाद उनकी संपत्ति में तेज वृद्धि हुई और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह बढ़कर 1.11 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गई। तकनीकी कंपनियों और अन्य कारोबारी उपक्रमों में उनकी हिस्सेदारी की बढ़ती कीमत ने उनकी व्यक्तिगत संपत्ति को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

अरबपतियों की संख्या भी तीन हजार के पार

ऑक्सफैम ने संपत्ति के इस बढ़ते संकेंद्रण को वैश्विक असमानता के व्यापक संदर्भ में रखा है। संगठन के मुताबिक एलन मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति दुनिया की सबसे गरीब 46 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 3.8 अरब लोगों की संयुक्त संपत्ति से भी ज्यादा है। इसी अवधि में दुनिया में अरबपतियों की संख्या भी बढ़ी है और 2025 में यह आंकड़ा 3,000 के पार पहुंच गया। इन आंकड़ों ने संपत्ति के वितरण और आर्थिक अवसरों की समानता को लेकर चिंता बढ़ाई है।

गरीबी कम होने की रफ्तार पर भी सवाल

वैश्विक संपत्ति में वृद्धि के समानांतर गरीबी की स्थिति में सुधार की रफ्तार अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रही। खासकर अत्यधिक गरीबी में रहने वाली आबादी के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि केवल आर्थिक वृद्धि को गरीबी उन्मूलन का पर्याप्त आधार मानना आसान नहीं है। लंबे समय से यह धारणा रही है कि अर्थव्यवस्था के बढ़ने के साथ रोजगार, आय और अवसरों का लाभ धीरे-धीरे समाज के कमजोर वर्गों तक भी पहुंचता है। मौजूदा आंकड़े इस धारणा की सीमाओं पर नए सिरे से चर्चा की जरूरत दिखाते हैं।

कर्ज का ब्याज स्वास्थ्य और शिक्षा से ज्यादा

गरीबी और असमानता की तस्वीर केवल व्यक्तिगत आय या संपत्ति तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन के अनुसार दुनिया में करीब 3.4 अरब लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जहां सरकारें स्वास्थ्य और शिक्षा पर होने वाले खर्च की तुलना में कर्ज का ब्याज चुकाने पर ज्यादा धन खर्च करती हैं। इसका सीधा असर सार्वजनिक सेवाओं की क्षमता पर पड़ सकता है, खासकर उन आबादी समूहों पर जो शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकारी व्यवस्था पर अधिक निर्भर हैं।

विकास मॉडल को लेकर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

बढ़ती संपत्ति और बनी हुई गरीबी के बीच अर्थशास्त्रियों तथा विशेषज्ञों के एक समूह ने द रोडमैप फॉर इरैडिकेटिंग पॉवर्टी बियॉन्ड ग्रोथ तैयार किया है। इसमें केवल आर्थिक वृद्धि को सफलता का पैमाना मानने के बजाय गरीबी खत्म करने और जीवन की बुनियादी सुविधाओं तक व्यापक पहुंच जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया गया है। वैश्विक स्तर पर जारी यह बहस अब इस बात के इर्द-गिर्द घूम रही है कि आर्थिक विकास से पैदा होने वाली संपत्ति का लाभ किस तरह ज्यादा व्यापक आबादी तक पहुंचाया जाए।

अमीरी बढ़ने के साथ अवसरों का सवाल भी अहम

दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ी कंपनियों, तकनीक और नए उद्योगों के विस्तार ने कुछ लोगों की संपत्ति में असाधारण वृद्धि की है। लेकिन दूसरी ओर बड़ी आबादी के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। यही वजह है कि आर्थिक असमानता पर चर्चा अब सिर्फ अमीरों की संपत्ति कितनी बढ़ी, इस सवाल तक सीमित नहीं है। असली चुनौती यह समझने की है कि आर्थिक प्रगति के अवसर कितने लोगों तक पहुंच रहे हैं और उसका लाभ समाज के कमजोर तबकों को किस हद तक मिल पा रहा है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.