UPI – भुगतान व्यवस्था पर नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखने की जीटीआरआई की सलाह
UPI – ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने भारत सरकार को सलाह दी है कि वह देश की डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़ी नीतियों में किसी बाहरी दबाव के आधार पर बदलाव न करे। संस्था का कहना है कि भारत को अपनी भुगतान व्यवस्था की मजबूती, प्रतिस्पर्धी माहौल और नीतिगत स्वायत्तता को प्राथमिकता देनी चाहिए। जीटीआरआई के अनुसार, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में लिए जाने वाले फैसले देश की आर्थिक जरूरतों और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर होने चाहिए।

संसद में पारित हुआ संशोधन विधेयक
हाल ही में लोकसभा ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से जुड़ा विधेयक पारित किया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर बैंकों और अन्य अधिकृत सेवा प्रदाताओं को यूपीआई तथा अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा। हालांकि, शुल्क लागू करने या उसकी दरों को लेकर अंतिम निर्णय सरकार की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
बिना शुल्क वाली व्यवस्था ने बढ़ाया डिजिटल भुगतान
जीटीआरआई ने कहा कि वर्तमान में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड जैसे निर्धारित भुगतान माध्यमों पर उपभोक्ताओं या व्यापारियों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। संस्था के अनुसार, शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नीति ने देश में डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ावा दिया है। इससे छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल लेनदेन आसान और सुलभ बना है।
टिकाऊ वित्तीय मॉडल की जरूरत पर जोर
थिंक टैंक का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुरक्षित और प्रभावी बनाए रखने के लिए बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और भुगतान सेवा प्रदाता लगातार साइबर सुरक्षा, सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी उन्नयन, धोखाधड़ी रोकथाम और विवाद समाधान पर निवेश करते हैं। ऐसे में इस पूरे तंत्र के लिए दीर्घकालिक वित्तीय मॉडल विकसित करना आवश्यक है। हालांकि, संस्था का मानना है कि सभी व्यापारियों पर एक समान शुल्क लगाना इसका एकमात्र समाधान नहीं है।
वैकल्पिक उपाय भी सुझाए
जीटीआरआई ने सुझाव दिया है कि सरकार लक्षित वित्तीय सहायता, प्रोत्साहन योजनाएं, बड़े कारोबारी लेनदेन पर सीमित शुल्क, वित्तीय सेवाओं के माध्यम से क्रॉस-सब्सिडी या केवल अधिक कारोबार वाले व्यापारियों पर नियंत्रित शुल्क जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है। संस्था का कहना है कि इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था भी मजबूत रहेगी और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।
5G सेवाओं के लिए ट्राई का नया प्रस्ताव
दूसरी ओर, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 5जी सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को अब 5जी नेटवर्क की डाउनलोड और अपलोड स्पीड की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। साथ ही, अलग-अलग सेवाओं के लिए पृथक टैरिफ निर्धारित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। यदि कंपनियां घोषित मानकों के अनुरूप सेवा नहीं देती हैं, तो उनके खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।