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Trade Deal – भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंचने के मिले संकेत

Trade Deal – भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक प्रगति सामने आई है। दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की अमेरिकी उप सहायक सचिव बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि समझौते को लेकर लंबे समय से जारी वार्ताओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और अब दोनों पक्ष अंतिम सहमति के काफी करीब हैं।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए मॉरिसन ने बताया कि इस समझौते को लेकर निर्धारित लक्ष्यों पर तेजी से काम किया गया है। उनके अनुसार, यदि बातचीत इसी दिशा में आगे बढ़ती रही तो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिल सकती है।

विशाल बाजार तक पहुंच को लेकर बढ़ी उम्मीदें

अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित समझौता लागू होने पर अमेरिकी कंपनियों और निर्यातकों के लिए भारत का बड़ा उपभोक्ता बाजार और अधिक सुलभ हो सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समझौते का उद्देश्य किसी एक पक्ष को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के लिए संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यवस्था तैयार करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों सरकारें आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साझा लक्ष्य पर गंभीरता से काम कर रही हैं और व्यापारिक बाधाओं को कम करने के लिए निरंतर संवाद जारी है।

2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

भारत और अमेरिका ने आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में “Mission 500” पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच कुल व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का उद्देश्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो यह लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती साझेदारी इस दिशा में सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

व्यापारिक आंकड़ों में दर्ज हुई मजबूत वृद्धि

हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक गतिविधियों में लगातार विस्तार देखा गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 149 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

अमेरिकी निर्यात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासकर भारत को होने वाले अमेरिकी निर्यात में लगभग 9.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक भागीदारी का संकेत माना जा रहा है।

निवेश सहयोग भी तेजी से बढ़ रहा

व्यापार के साथ-साथ निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। “SelectUSA” कार्यक्रम के दौरान भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश की संभावनाएं व्यक्त की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20 अरब डॉलर के संभावित निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 1.1 अरब डॉलर का निवेश तत्काल स्तर पर आगे बढ़ाया गया है।

यह निवेश न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा दे सकता है।

नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक

व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान अंतरिम व्यापार समझौते और व्यापक आर्थिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

बैठक में अमेरिका की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। दोनों पक्षों ने लंबी अवधि के व्यापारिक सहयोग को मजबूत बनाने और लंबित मुद्दों के समाधान पर विचार-विमर्श किया।

दोनों देशों ने जताया सकारात्मक रुख

अमेरिकी दूतावास ने भी इस बातचीत को रचनात्मक बताते हुए कहा कि उद्देश्य एक ऐसा निष्पक्ष समझौता तैयार करना है जिससे दोनों देशों के कारोबारी समुदाय को लाभ मिल सके। वहीं पीयूष गोयल ने अमेरिकी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए आर्थिक साझेदारी के भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत सफल रहती है तो यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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