StockMarket – शुरुआती दबाव के बाद बाजार में लौटी खरीदारी
StockMarket – घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को कमजोर शुरुआत की, लेकिन शुरुआती दबाव से उबरते हुए बाद में प्रमुख सूचकांकों में सुधार देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल रहा, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। हालांकि कुछ समय बाद चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई कर ली।

शुरुआती कारोबार में दिखी कमजोरी
कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स करीब 111 अंक की गिरावट के साथ 77,044 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी शुरुआती सत्र में दबाव में रहा। विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये पर दबाव देखने को मिला और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा कमजोर होकर 94.71 के स्तर तक पहुंच गई।
हालांकि शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद बाजार में सुधार आया और दोनों प्रमुख सूचकांक फिर से बढ़त के साथ कारोबार करने लगे। बाद के सत्र में सेंसेक्स 77,264 अंक के ऊपर और निफ्टी 24,130 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
किन शेयरों में रही सबसे अधिक हलचल
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में सूचना प्रौद्योगिकी और कुछ बड़े निजी क्षेत्र के शेयरों पर दबाव देखा गया। इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और कोटक महिंद्रा बैंक शुरुआती कारोबार में कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहे।
दूसरी ओर, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को सहारा मिला। पिछले चार कारोबारी सत्रों में बाजार पहले ही मजबूत तेजी दर्ज कर चुका था, इसलिए कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता भी चुना।
वैश्विक संकेतों का दिखा असर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की सतर्कता के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम प्रमुख कारण रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेतों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अमेरिका में महंगाई का दबाव अपेक्षा से अधिक बने रहने के कारण आगे की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इसके असर से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की धारणा को प्रभावित किया। यही कारण रहा कि भारतीय बाजार में भी शुरुआत में दबाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों ने क्या कहा
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, फेडरल रिजर्व के हालिया संकेतों ने निवेशकों को चौंकाया है। आमतौर पर नरम रुख की उम्मीद के बीच सख्त संदेश आने से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियादी स्थिति बाजार को दीर्घकाल में समर्थन देती रहेगी।
विश्लेषकों के मुताबिक, यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख जारी रह सकता है। घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी भी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है।
कच्चे तेल में नरमी से मिली राहत
इस बीच निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। तेल की कीमतों में नरमी का असर महंगाई और चालू खाते के संतुलन पर भी सकारात्मक माना जाता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।
एचडीएफसी बैंक की महत्वपूर्ण उपलब्धि
वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी एक अहम खबर में एचडीएफसी बैंक ने विदेशी वित्त जुटाने के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। बैंक ने रिजर्व बैंक की विशेष स्वैप सुविधा का उपयोग करते हुए 750 मिलियन डॉलर की बाहरी वाणिज्यिक उधारी जुटाई है। इस व्यवस्था का उपयोग करने वाला यह पहला भारतीय बैंक बन गया है। बैंकिंग क्षेत्र के लिए इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।