बिज़नेस

StainlessSteel – राष्ट्रीय नीति की मांग, जंग से हर साल हो रहा है लाखों करोड़ का आर्थिक नुकसान

StainlessSteel – भारत में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परिसंपत्तियों पर जंग लगने से होने वाले आर्थिक नुकसान को देखते हुए स्टेनलेस स्टील उद्योग ने केंद्र सरकार से अलग राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है। इंडियन स्टेनलेस स्टील डेवलपमेंट एसोसिएशन (ISSDA) और ग्लोबल स्टेनलेस स्टील एक्सपो (GSSE) का कहना है कि स्टेनलेस स्टील उद्योग के लिए विशेष नीति और राष्ट्रीय एंटी-करॉजन नीति लागू होने से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और दीर्घकालिक आधार पर बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता बेहतर हो सकेगी।

जंग से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा बड़ा असर

मुंबई में आयोजित एक उद्योग कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि जंग के कारण देश को हर वर्ष लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। यह नुकसान सार्वजनिक निर्माण, परिवहन नेटवर्क, औद्योगिक परिसंपत्तियों और अन्य आधारभूत ढांचों के रखरखाव पर बढ़ते खर्च के रूप में सामने आता है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि निर्माण के शुरुआती चरण में टिकाऊ सामग्री का उपयोग बढ़ाया जाए तो भविष्य में मरम्मत और पुनर्निर्माण की लागत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आयात पर निर्भरता बनी चिंता का विषय

ISSDA के अनुसार, भारत में स्टेनलेस स्टील उत्पादन की वार्षिक क्षमता करीब 75 लाख टन है, लेकिन वर्तमान में इसका केवल 60 से 65 प्रतिशत ही उपयोग हो रहा है। इसके बावजूद घरेलू मांग का लगभग एक-चौथाई हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है, जिसमें चीन प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजामणि कृष्णमूर्ति ने कहा कि भारत के पास तकनीकी क्षमता और उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए स्पष्ट और दीर्घकालिक नीति समर्थन आवश्यक है।

अलग नीति से उद्योग को मिलने की उम्मीद

उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि स्टेनलेस स्टील की उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल की जरूरत और उपयोग के क्षेत्र सामान्य स्टील से अलग हैं, फिर भी दोनों को एक ही श्रेणी में देखा जाता है। उनका मानना है कि अलग राष्ट्रीय स्टेनलेस स्टील नीति लागू होने से कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर होगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और वैल्यू-एडेड उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

एंटी-करॉजन नीति पर भी दिया जोर

उद्योग संगठनों ने राष्ट्रीय एंटी-करॉजन नीति लागू करने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि इस नीति के जरिए जीवनचक्र आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर योजना को बढ़ावा मिलेगा और विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में जंग-रोधी सामग्रियों के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेनलेस स्टील अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ होता है और इसके रखरखाव की लागत भी कम रहती है, जिससे लंबे समय में सार्वजनिक परियोजनाओं पर होने वाला खर्च घटाया जा सकता है।

प्रति व्यक्ति खपत बढ़ाने पर उद्योग का फोकस

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति स्टेनलेस स्टील की खपत करीब 3.5 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 6 से 7 किलोग्राम के बीच है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत वैश्विक औसत के करीब पहुंचता है तो अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित करने की जरूरत पड़ेगी, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उद्योग का यह भी कहना है कि रेलवे, शहरी विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सरकारी निवेश के साथ स्टेनलेस स्टील की मांग आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.