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OilMarket – अगस्त से तेल उत्पादन बढ़ाएगा ओपेक प्लस, कीमतों पर रहेगी नजर

OilMarket- तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस ने अगस्त 2026 से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त कच्चे तेल का उत्पादन करने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति पहले की तुलना में सामान्य होती दिख रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आपूर्ति आने वाले महीनों में वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

उत्पादन में धीरे-धीरे लौट रही है रफ्तार

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ओपेक प्लस का कुल उत्पादन फरवरी में करीब 4.28 करोड़ बैरल प्रतिदिन था, जो मई तक घटकर लगभग 3.31 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गया। जून के दौरान निर्यात गतिविधियों में सुधार आने से उत्पादन फिर बढ़ने लगा, हालांकि यह अभी भी पहले के स्तर तक नहीं पहुंचा है। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात अप्रैल के अंत में संगठन से अलग हो चुका है, जिससे समूह की संरचना में भी बदलाव आया है।

चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा रहा उत्पादन

सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान सहित सात प्रमुख उत्पादक देश अप्रैल से जुलाई के बीच अपने उत्पादन कोटे में करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी कर चुके हैं। ये देश वर्ष 2023 में लागू की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की स्वैच्छिक उत्पादन कटौती को धीरे-धीरे वापस ले रहे हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान निर्यात प्रभावित रहने से इस अतिरिक्त उत्पादन का पूरा असर बाजार में दिखाई नहीं दे सका।

कीमतों को किन कारणों से मिला संतुलन

आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चीन से अपेक्षा से कमजोर आयात मांग, ओपेक प्लस के बाहर के उत्पादक देशों की बढ़ती आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ओर से रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग ने बाजार को संतुलित रखने में योगदान दिया है। पिछले कारोबारी सप्ताह के अंत तक ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास दर्ज किया गया।

अधिक आपूर्ति की आशंका पर विशेषज्ञों की नजर

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि उत्पादन वृद्धि का मौजूदा क्रम जारी रहता है और वैश्विक मांग में उल्लेखनीय तेजी नहीं आती, तो बाजार में आपूर्ति मांग से अधिक हो सकती है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना बनी रहेगी। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े निवेशक और आयातक देश आने वाले महीनों में उत्पादन और मांग के आंकड़ों पर विशेष नजर रखेंगे।

यूएई के बाहर होने से उठे नए सवाल

संयुक्त अरब अमीरात के संगठन से अलग होने के बाद ओपेक प्लस की आंतरिक एकजुटता को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। हालांकि उत्पादन बढ़ाने का ताजा फैसला यह संकेत देता है कि प्रमुख सदस्य देश अभी भी सामूहिक रणनीति के तहत बाजार को संतुलित रखने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में वैश्विक मांग, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और सदस्य देशों की उत्पादन नीति तेल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।

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