MSMELoans – 12.38 लाख करोड़ पार पहुंची सीजीटीएमएसई योजना के तहत गारंटी राशि
MSMELoans – देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बिना जोखिम के कर्ज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही सीजीटीएमएसई योजना के तहत बैंकों द्वारा दी गई कुल गारंटी राशि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर लगभग 12.38 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह राशि उन ऋणों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है, जिनमें चूक होने पर बैंकों को नुकसान से बचाव मिलता है। इस योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है और छोटे कारोबारियों के लिए वित्तीय पहुंच को आसान बना रहा है।

राज्यों में बढ़ती भागीदारी का असर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के तहत विभिन्न राज्यों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश ने गारंटी लेने वाली इकाइयों की संख्या में देशभर में शीर्ष स्थान हासिल किया है। राज्य में करीब 19 लाख सूक्ष्म इकाइयों को इस योजना का लाभ मिला है, जो महाराष्ट्र और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों की संयुक्त संख्या से भी अधिक है। यह संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश में छोटे स्तर के उद्यमों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और उन्हें औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने की प्रक्रिया मजबूत हुई है।
गारंटी राशि में महाराष्ट्र सबसे आगे
जहां इकाइयों की संख्या में उत्तर प्रदेश अग्रणी है, वहीं कुल बीमित राशि के मामले में महाराष्ट्र पहले स्थान पर बना हुआ है। राज्य में 1.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को सुरक्षा दी गई है। इसके बाद उत्तर प्रदेश 1.28 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है। गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक भी इस सूची में प्रमुख स्थान रखते हैं, जिनकी गारंटी राशि क्रमशः 1.04 लाख करोड़ रुपये, 92,604 करोड़ रुपये और 92,375 करोड़ रुपये है। इन आंकड़ों से साफ है कि औद्योगिक रूप से मजबूत राज्यों में बड़े आकार के ऋण अधिक दिए जा रहे हैं।
छोटे और बड़े कर्ज के पैटर्न में अंतर
राज्यों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर औसत ऋण राशि को लेकर भी सामने आता है। महाराष्ट्र में प्रति गारंटी औसत कर्ज करीब 13.9 लाख रुपये है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह औसतन लगभग 7 लाख रुपये के आसपास है। इसका सीधा अर्थ है कि महाराष्ट्र में पूंजी-आधारित और बड़े उद्योगों को ज्यादा वित्तीय सहायता मिल रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में छोटे और रोजगार-आधारित व्यवसायों का दबदबा है। इससे क्षेत्रीय आर्थिक संरचना की झलक मिलती है।
शीर्ष राज्यों की सूची में विविधता
गारंटी लेने वाली इकाइयों की संख्या के आधार पर शीर्ष पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश पहले, महाराष्ट्र दूसरे, तमिलनाडु तीसरे, कर्नाटक चौथे और गुजरात पांचवें स्थान पर हैं। यह सूची बताती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में एमएसएमई सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। दक्षिण भारत के राज्य भी इस योजना में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा मिल रहा है।
शहरों में कर्ज सुरक्षा का केंद्र
शहरी क्षेत्रों में भी इस योजना का असर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में सबसे ज्यादा गारंटी दर्ज की गई है, जहां 19 हजार से अधिक मामलों में करीब 4,130 करोड़ रुपये का कर्ज सुरक्षित किया गया है। इसके अलावा गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, कानपुर नगर और वाराणसी जैसे शहर भी इस सूची में शामिल हैं। इन शहरों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार तेज होने के कारण बैंकिंग सेवाओं की मांग भी अधिक है।
वित्तीय समावेशन को मिल रही गति
सीजीटीएमएसई योजना के बढ़ते दायरे से यह स्पष्ट है कि देश में वित्तीय समावेशन को नई गति मिल रही है। छोटे उद्यमियों को बिना किसी बड़ी गारंटी के कर्ज मिलना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है। इससे न केवल नए व्यवसाय शुरू हो रहे हैं, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। बैंकिंग तंत्र के लिए भी यह योजना जोखिम को कम करने में सहायक साबित हो रही है।