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LoanRates – आरबीआई की नई पहल से सभी वित्तीय संस्थानों में ब्याज नियम होंगे समान

LoanRates– भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कर्ज पर लगने वाली ब्याज दरों को अधिक पारदर्शी और एक समान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने प्रस्ताव दिया है कि बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) और अन्य सभी विनियमित वित्तीय संस्थान भविष्य में एक समान सिद्धांत के आधार पर ब्याज दरें तय करें। इस बदलाव का उद्देश्य ग्राहकों को अलग-अलग संस्थानों की ऋण शर्तों को आसानी से समझने और उनकी तुलना करने की सुविधा देना है। प्रस्तावित मसौदा जल्द ही सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया जाएगा।

अलग-अलग नियमों की जगह एक समान व्यवस्था

तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न वित्तीय संस्थान ब्याज दर तय करने के लिए अलग-अलग मानक अपनाते हैं। जहां बैंक MCLR और EBLR जैसे बेंचमार्क का उपयोग करते हैं, वहीं NBFC और अन्य संस्थानों के अपने अलग तरीके हैं। इससे ग्राहकों के लिए यह समझना कठिन हो जाता है कि किस संस्थान का ऋण वास्तव में अधिक किफायती है। प्रस्तावित मानकीकरण इस भ्रम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ग्राहकों को क्या होगा फायदा

नई व्यवस्था लागू होने पर सभी संस्थानों में ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया और उसकी गणना अधिक स्पष्ट होगी। इससे ऋण समझौतों में छिपी शर्तों की संभावना कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। ग्राहक विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लोन ऑफर की बेहतर तुलना कर सकेंगे। साथ ही, यदि भविष्य में रेपो रेट में बदलाव होता है तो उसका लाभ फ्लोटिंग रेट वाले कर्जधारकों तक तय समय पर पहुंचने की संभावना भी बढ़ेगी। इससे मनमाने ब्याज या अतिरिक्त शुल्क को लेकर शिकायतों में भी कमी आ सकती है।

22 साल बाद नए शहरी सहकारी बैंकों को मिलेगा मौका

आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंक (UCB) क्षेत्र के लिए भी अहम घोषणा की है। करीब 22 वर्षों बाद नए शहरी सहकारी बैंक खोलने के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे। केंद्रीय बैंक ने ऑन-टैप लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत पात्र संस्थाएं किसी भी समय आवेदन कर सकेंगी। आरबीआई के अनुसार, वर्षों में नियामकीय ढांचे और गवर्नेंस में सुधार के बाद यह फैसला लिया गया है।

लाइसेंस के लिए तय की गई पात्रता

प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी ही शहरी सहकारी बैंक बनने के लिए आवेदन कर सकेंगी। आवेदन करने वाली संस्था के पास पिछले वित्त वर्ष की 31 मार्च तक कम से कम 300 करोड़ रुपये की पूंजी होना आवश्यक होगा। इसके अलावा लाइसेंस जारी होने के समय शुद्ध एनपीए तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। विस्तृत मसौदा दिशानिर्देश जल्द सार्वजनिक किए जाएंगे।

यूपीआई शुल्क और अर्थव्यवस्था पर आरबीआई का नजरिया

यूपीआई लेनदेन को लेकर गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का शुल्क लगाने का फैसला नहीं किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन की लागत किसी न किसी स्तर पर वहन करनी होगी और इस विषय पर सरकार विचार कर रही है।

इसी के साथ आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं खुदरा महंगाई का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन संशोधित अनुमानों से विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी, जबकि रेपो रेट को फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

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