Business – केजी बेसिन गैस विवाद में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट में उठी चर्चा
Business – कृष्णा-गोदावरी बेसिन से जुड़े बहुचर्चित गैस विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसकी विदेशी साझेदार कंपनियों ने केंद्र सरकार के साथ विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया अपनाने की इच्छा जाहिर की। देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट कानूनी मामलों में शामिल इस विवाद पर अदालत की नजर बनी हुई है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल रहे। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अदालत के सामने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
कंपनियों ने मध्यस्थता की प्रक्रिया का दिया संकेत
रिलायंस और उसकी साझेदार कंपनियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अदालत को बताया कि सभी याचिकाकर्ता केंद्र सरकार को पत्र भेजकर औपचारिक रूप से मध्यस्थता शुरू करने का अनुरोध करेंगे। कंपनियों ने यह भी कहा कि जब तक मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी जाए।
कंपनियों का मानना है कि बातचीत और मध्यस्थता के जरिए विवाद का समाधान निकालना बेहतर विकल्प हो सकता है। इस कदम को लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार ने सुनवाई रोकने का किया विरोध
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटारमानी ने अदालत में कहा कि फिलहाल मामले की सुनवाई जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मध्यस्थता प्रक्रिया में कोई सकारात्मक प्रगति होती है तो सरकार अदालत को इसकी जानकारी देगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और वित्तीय प्रभाव को देखते हुए न्यायिक प्रक्रिया को रोका जाना उचित नहीं होगा। इसके बाद अदालत ने भी तत्काल सुनवाई स्थगित करने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष सफल मध्यस्थता के साथ अदालत के सामने आते हैं, तो मामले का समाधान संभव है। अदालत ने संकेत दिया कि समझौते की स्थिति बनने पर वह विवाद के निपटारे पर विचार करेगी।
हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि जब तक कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आती, तब तक न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। इस मामले की अंतिम सुनवाई 19 मई से चल रही है और अदालत लगातार पक्षों की दलीलें सुन रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती
रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी एक्सप्लोरेशन और निको लिमिटेड ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने फरवरी 2025 में दिए गए अपने आदेश में उस अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द कर दिया था, जो कंपनियों के पक्ष में आया था।
इससे पहले हाई कोर्ट की एकल पीठ ने ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा था। बाद में डिवीजन बेंच ने उस आदेश को पलट दिया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
क्या है पूरा गैस माइग्रेशन विवाद
यह मामला कृष्णा-गोदावरी बेसिन में गैस भंडारों से गैस निकासी को लेकर है। केंद्र सरकार का आरोप है कि कंपनियों ने ऐसे गैस क्षेत्रों से उत्पादन किया, जिन पर उनका अधिकार नहीं था। सरकार ने इस कथित नुकसान के बदले करीब 1.55 अरब अमेरिकी डॉलर की मांग की थी।
वहीं, वर्ष 2018 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने बहुमत के फैसले में सरकार के दावे को खारिज कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें 8.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर का मुआवजा देने का आदेश भी दिया था। अब इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और संभावित मध्यस्थता प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।