बिहार

SolarProject – रामसागर तालाब का सोलर प्लांट वर्षों से पड़ा निष्क्रिय

SolarProject – शहर के ऐतिहासिक रामसागर तालाब में स्थापित सोलर ऊर्जा परियोजना आज उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। तालाब की स्वच्छता बनाए रखने और परिसर को रोशन करने के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर तैयार की गई यह व्यवस्था लंबे समय से बंद पड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस योजना से पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुविधा दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद थी, वह कुछ ही महीनों में ठप हो गई।

करीब 45 लाख रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के बंद होने के बाद अब इसके उपकरण जर्जर होते जा रहे हैं। इससे सरकारी परियोजनाओं के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

तालाब संरक्षण के लिए शुरू की गई थी योजना

करीब छह वर्ष पहले रामसागर तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण को ध्यान में रखते हुए यहां सोलर प्लांट लगाया गया था। योजना का उद्देश्य सौर ऊर्जा के माध्यम से मोटर पंप संचालित करना, जलस्तर बनाए रखना और तालाब परिसर में स्थापित प्रकाश व्यवस्था को ऊर्जा उपलब्ध कराना था।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार शुरुआत में यह व्यवस्था सुचारु रूप से चली और तालाब परिसर की स्थिति में सुधार भी देखने को मिला। हालांकि कुछ महीनों बाद तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं और धीरे-धीरे पूरा सिस्टम बंद हो गया।

रखरखाव के अभाव में बढ़ी समस्या

वर्तमान में सोलर पैनल, मोटर पंप और अन्य उपकरण उपयोग से बाहर हैं। कई हिस्सों पर जंग लग चुकी है, जबकि कुछ उपकरण पूरी तरह खराब हो चुके हैं। नियमित देखरेख नहीं होने के कारण परियोजना की स्थिति लगातार खराब होती गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर मरम्मत और तकनीकी निरीक्षण कराया जाता तो इस योजना को बचाया जा सकता था। अब लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई व्यवस्था बेकार पड़ी दिखाई देती है।

नागरिकों ने उठाए सवाल

रामसागर तालाब शहर की ऐतिहासिक पहचान और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में यहां की अव्यवस्था को लेकर नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक धन से तैयार परियोजनाओं के प्रति जवाबदेही तय होनी चाहिए।

स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि परियोजना की स्थिति की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि रखरखाव में लापरवाही कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

नगर निगम करेगा तकनीकी मूल्यांकन

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम आयुक्त अभिषेक पलासिया ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मिली है और जल्द ही तकनीकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि परियोजना किस संस्था या कंपनी द्वारा स्थापित की गई थी और रखरखाव की जिम्मेदारी किसके पास थी।

नगर निगम के अनुसार जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यदि संबंधित एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं की हैं तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

दोबारा शुरू करने की तैयारी

नगर निगम का कहना है कि तकनीकी टीम पूरे सिस्टम का निरीक्षण करेगी और यह आकलन किया जाएगा कि किन उपकरणों की मरम्मत संभव है और किन्हें बदलने की आवश्यकता है। प्रशासन की कोशिश रहेगी कि परियोजना को फिर से संचालित किया जाए ताकि इसका लाभ स्थानीय लोगों को मिल सके।

अधिकारियों का मानना है कि सोलर आधारित यह व्यवस्था दोबारा चालू होने पर तालाब के रखरखाव और पर्यावरण संरक्षण में मददगार साबित हो सकती है।

पर्यटन नगरी की छवि से जुड़ा मामला

गया देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में शहर के ऐतिहासिक स्थलों और सार्वजनिक परिसरों की बेहतर स्थिति बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। नगर निगम का कहना है कि रामसागर तालाब से जुड़ी इस परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि शहर की छवि और सुविधाओं में सुधार हो सके।

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