Census2027 – बिहार में आज समाप्त होगी डिजिटल जनगणना की स्व-गणना प्रक्रिया
Census2027 – बिहार में जनगणना 2027 के तहत चल रही स्व-गणना प्रक्रिया शुक्रवार रात 12 बजे समाप्त हो जाएगी। 17 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 42 लाख से अधिक लोगों ने मोबाइल और कंप्यूटर के माध्यम से अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कराई है। राज्य के कई जिलों में लोगों ने डिजिटल माध्यम से बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई है, जिससे यह अभियान तेजी से आगे बढ़ता नजर आया।

भारतीय जनगणना निदेशालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मधुबनी जिला इस प्रक्रिया में सबसे आगे रहा है। यहां 5 लाख 71 हजार से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन स्व-गणना पूरी की। वैशाली दूसरे और दरभंगा तीसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा गोपालगंज, पटना, भोजपुर, खगड़िया, औरंगाबाद, पश्चिम चंपारण और कटिहार भी शीर्ष जिलों की सूची में शामिल हैं।
आज रात तक ही उपलब्ध रहेगा ऑनलाइन विकल्प
जनगणना निदेशालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा केवल एक मई की रात 12 बजे तक उपलब्ध रहेगी। जिन लोगों ने अभी तक अपनी जानकारी दर्ज नहीं कराई है, वे आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल प्रणाली को सरल और सुरक्षित बनाया गया है ताकि लोग बिना किसी परेशानी के घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज कर सकें।
डिप्टी डायरेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि जिन नागरिकों को मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए जानकारी भरने में कठिनाई हो रही है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। दो मई से प्रगणक घर-घर जाकर जनगणना का कार्य शुरू करेंगे और आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
दूसरे राज्यों में रहने वाले लोगों को भी राहत
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिहार से बाहर रहने वाले लोगों की गणना भी वैध मानी जाएगी। वे जिस राज्य में रह रहे हैं, वहां जनगणना प्रक्रिया शुरू होने पर अपनी जानकारी दर्ज करा सकेंगे। इससे प्रवासी लोगों को अलग से किसी अतिरिक्त प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि एकत्र किए गए सभी आंकड़ों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की जानकारी का दुरुपयोग न हो सके।
डिजिटल तकनीक से होगी पूरी निगरानी
जनगणना 2027 को देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना बनाने की तैयारी की जा रही है। इस बार पारंपरिक कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, मोबाइल एप के जरिए डेटा संग्रह किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से की जा रही है।
इसके लिए Census Monitoring and Management System नाम का विशेष पोर्टल तैयार किया गया है, जो रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा देता है। साथ ही हर घर और इलाके की जियो-टैगिंग भी की जा रही है ताकि आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित हो सके।
प्रशासन को डिजिटल प्रक्रिया से बेहतर परिणाम की उम्मीद
राज्य सरकार और जनगणना विभाग का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से समय की बचत होगी और आंकड़ों की सटीकता भी बेहतर होगी। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रगणकों के जरिए ऑफलाइन प्रक्रिया भी तेज की जाएगी ताकि कोई भी व्यक्ति जनगणना से छूट न जाए।