बिहार

Archive – लालू प्रसाद से जुड़ी किताबें कचरे में मिलने पर रोहिणी आचार्य ने उठाए सवाल

Archive- राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के जीवन एवं राजनीतिक सफर से जुड़ी कई पुस्तकें, जीवनी और स्मारिकाएं पटना के समीप संपतचक क्षेत्र के उदेनी इलाके में एच-524 के पास कथित रूप से कचरे के ढेर में मिलने का मामला सामने आया है। इन प्रकाशनों में लालू लीला, गोपालगंज से रायसीना सहित कई अन्य पुस्तकें शामिल बताई जा रही हैं। घटना सामने आने के बाद राजद नेता और लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने इस पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में सवाल उठाया कि लालू प्रसाद यादव से जुड़ी पुस्तकें और स्मृति सामग्री इस स्थिति में वहां तक कैसे पहुंचीं। उन्होंने पूछा कि आखिर इन दस्तावेजों को कचरे में फेंकने के पीछे कौन जिम्मेदार है और ऐसा करने का उद्देश्य क्या था। उनके अनुसार यह केवल कुछ पुस्तकों का मामला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों का प्रश्न भी है।

विरासत से जुड़े दस्तावेजों पर चिंता

रोहिणी आचार्य ने कहा कि उनके पिता के सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक योगदान और सामाजिक कार्यों से संबंधित सामग्री ऐतिहासिक महत्व रखती है। उनका कहना है कि ऐसी पुस्तकों और स्मारिकाओं का इस तरह मिलना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसी ने जानबूझकर इस विरासत को नुकसान पहुंचाने या उसे सार्वजनिक स्मृति से दूर करने का प्रयास किया है।

निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

अपने बयान में रोहिणी आचार्य ने इस घटना को सामान्य लापरवाही मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित सामग्री वहां कैसे पहुंची और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि तथ्यों के सामने आने से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में भी मदद मिलेगी।

राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व का मामला

लालू प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और उनके जीवन पर लिखी गई पुस्तकें तथा प्रकाशित दस्तावेज शोधकर्ताओं और राजनीतिक इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में इन पुस्तकों के कचरे के ढेर में मिलने की घटना ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा को जन्म दिया है। फिलहाल इस मामले में संबंधित प्रशासनिक या अन्य पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

घटना के सार्वजनिक होने के बाद अब सभी की निगाह इस बात पर है कि संबंधित एजेंसियां या प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। यदि जांच शुरू होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह घटना लापरवाही का परिणाम थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। फिलहाल मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है, जबकि रोहिणी आचार्य ने निष्पक्ष जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग दोहराई है।

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