ElectionUpdate – तमिलनाडु में सीट बंटवारे पर सहमति के करीब पहुंची डीएमके
ElectionUpdate – तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सभी प्रमुख दल अब अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) भी अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लेकर निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वामपंथी दलों के साथ बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।

वामपंथी दलों के साथ अंतिम दौर की बातचीत
डीएमके और उसके सहयोगी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के बीच सीटों को लेकर बातचीत पिछले कुछ समय से जारी है। अब यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व 2021 के विधानसभा चुनाव के फॉर्मूले को ही जारी रखने के पक्ष में नजर आ रहा है। उस समय भी इन दोनों दलों को समान संख्या में सीटें दी गई थीं, और इस बार भी उसी व्यवस्था को दोहराने की तैयारी है।
छह-छह सीटों पर सहमति की संभावना
अंदरूनी जानकारी के अनुसार, डीएमके नेतृत्व दोनों वामपंथी दलों को छह-छह सीटें देने के प्रस्ताव पर सहमत हो सकता है। यह वही संख्या है, जिस पर पिछली बार चुनाव लड़ा गया था। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से विचार-विमर्श के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है और इसे जल्द सार्वजनिक किया जा सकता है।
वाम दलों की अतिरिक्त सीटों की मांग
इस बार स्थिति थोड़ी अलग भी नजर आ रही है। भाकपा और माकपा दोनों ही दल एक-एक अतिरिक्त सीट की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत हुई है और उन्हें अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर माकपा नेताओं ने मंगलवार को चेन्नई स्थित अन्ना अरिवलयम में डीएमके की सीट बंटवारा समिति से मुलाकात की और अपनी बात रखी।
बैठक में सकारात्मक संकेत मिले
बैठक के बाद माकपा के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि चर्चा रचनात्मक माहौल में हुई और उम्मीद है कि सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। यह संकेत देता है कि गठबंधन में फिलहाल किसी बड़े मतभेद की स्थिति नहीं है और सहमति बनने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
गठबंधन संतुलन बनाए रखने पर जोर
डीएमके के भीतर शुरुआती स्तर पर वामपंथी दलों के लिए सीटों की संख्या घटाने का विचार भी सामने आया था। चर्चा थी कि सीटें पांच-पांच तक सीमित की जा सकती हैं। हालांकि, बाद में पार्टी नेतृत्व ने यह समझा कि चुनाव से पहले किसी भी प्रकार का असंतोष गठबंधन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी कारण अब पहले की तरह संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन की भूमिका अहम रही है, और इस बार भी सभी दल चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपने समीकरण मजबूत करने में लगे हुए हैं। आने वाले दिनों में सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा के साथ तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।