बिहार

NitishKumar – राज्यसभा चुनाव के बीच नीतीश के अगले कदम पर टिकी नजर

NitishKumar – बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव को लेकर कई बड़े नेता मैदान में हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को लेकर हो रही है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी उम्मीदवार हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर खास तौर पर नीतीश कुमार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि यदि वे संसद की राजनीति की ओर बढ़ते हैं तो उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा

राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में यह चर्चा इसलिए भी तेज है कि यदि नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लेते हैं तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बन सकती है। ऐसे में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल सकता है।

राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि नीतीश कुमार का अंतिम निर्णय क्या होगा और वह कब तक अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। फिलहाल उनकी ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, जिससे सियासी अटकलें लगातार जारी हैं।

बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए जाने जाते हैं नीतीश

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिनके राजनीतिक फैसलों का अनुमान लगाना अक्सर कठिन माना जाता है। पिछले कई वर्षों में उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों के साथ काम किया है।

2014 के आम चुनाव से पहले जब भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाना शुरू किया था, उसी दौर में नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का फैसला लिया था। बाद में 2017 में वे फिर से उसी गठबंधन में लौटे, जबकि 2022 में उन्होंने फिर अलग राह चुन ली। इसके बाद 2024 में उन्होंने एक बार फिर भाजपा के साथ गठबंधन किया। इन लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण उनका हर फैसला चर्चा का विषय बन जाता है।

संसदीय और राज्य राजनीति का लंबा अनुभव

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला हुआ है और उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह पटना जिले की बाढ़ लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं और नालंदा जिले की हरनौत विधानसभा सीट से विधायक भी चुने गए थे।

हाल के वर्षों में वह विधानसभा चुनाव लड़ने के बजाय विधान परिषद के सदस्य के रूप में सक्रिय रहे हैं। वर्तमान में भी वे विधान परिषद के सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

एक साथ सांसद और विधायक बनने की घटना

नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में एक दिलचस्प घटना भी दर्ज है। वर्ष 1991 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद 1995 में उन्होंने समता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में हरनौत विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

हालांकि उस समय उन्होंने विधायक पद की शपथ नहीं ली और सांसद के रूप में ही अपनी भूमिका जारी रखी। इसके कारण बाद में हरनौत विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा, जिसमें समता पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली।

केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भूमिका

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर में केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। 1989 में वह पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए थे और उसी दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में उन्हें केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया था।

इसके बाद उन्होंने कई बार लोकसभा चुनाव जीते और अलग-अलग केंद्रीय मंत्रालयों में काम किया। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें रेल और भूतल परिवहन मंत्री बनाया गया था। 1999 में गैसाल रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

बिहार की राजनीति में लंबा कार्यकाल

नई सदी की शुरुआत के बाद नीतीश कुमार ने अपना राजनीतिक ध्यान बिहार की राजनीति पर केंद्रित किया। वर्ष 2005 में वह पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने और उसके बाद लंबे समय तक इस पद पर बने रहे।

बीच में एक बार उन्होंने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद सौंपा था, लेकिन बाद में फिर से राज्य की कमान संभाली। पिछले दो दशकों में बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बना रहा है और आज भी उनके फैसलों का राज्य की राजनीति पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.