GovernorOath – बिहार के नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ली शपथ
GovernorOath – बिहार को नया राज्यपाल मिल गया है। शनिवार सुबह पटना स्थित राजभवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में सैयद अता हसनैन ने राज्यपाल पद की शपथ ली। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा सहित राज्य सरकार के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। समारोह राजभवन परिसर में शांत और गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया।

लंबे सैन्य अनुभव के साथ नई जिम्मेदारी
सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और उन्हें एक अनुभवी रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है। लगभग चार दशक तक सेना में सेवा देने के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नेतृत्व किया। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आतंकवाद पर नियंत्रण के प्रयासों में उनकी भूमिका उल्लेखनीय मानी जाती है।
सेना में रहते हुए उन्होंने केवल सुरक्षा अभियानों तक ही सीमित भूमिका नहीं निभाई, बल्कि स्थानीय लोगों और सेना के बीच भरोसा बढ़ाने की दिशा में भी कई पहल की। इस कारण उन्हें नागरिक और सैन्य संबंधों को बेहतर बनाने वाले अधिकारियों में गिना जाता है।
सैन्य परिवार से जुड़ा रहा जीवन
सैयद अता हसनैन का जन्म वर्ष 1952 में एक सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था। उनके पिता मेजर जनरल सैयद महदी हसनैन भी भारतीय सेना में उच्च पद पर रह चुके थे। बचपन से ही अनुशासन और सेवा की भावना उनके जीवन का हिस्सा रही।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज से पूरी की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 1972 में इतिहास विषय में स्नातक (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने सुरक्षा और रणनीतिक अध्ययन से जुड़े विषयों में भी गहरी रुचि दिखाई और इसी उद्देश्य से विदेश में भी अध्ययन किया।
भारतीय सेना में महत्वपूर्ण भूमिका
सैयद अता हसनैन को 16 जून 1974 को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी से भारतीय सेना में कमीशन मिला। इसके बाद उनकी नियुक्ति गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन में हुई। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण अभियानों में भाग लिया।
श्रीलंका में चलाए गए ऑपरेशन पवन के दौरान उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के तहत मोजाम्बिक और रवांडा में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।
सेना में विभिन्न पदों पर नेतृत्व
अपने लंबे सैन्य करियर में सैयद अता हसनैन ने कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली। ब्रिगेडियर के रूप में उन्होंने उरी क्षेत्र में 12वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व किया। इसके बाद मेजर जनरल के रूप में बारामूला स्थित 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली।
लेफ्टिनेंट जनरल बनने के बाद उन्हें भोपाल में स्थित XXI कोर का जनरल ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया। वर्ष 2010 में उन्हें कश्मीर में XV कोर का कमांडर बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय समुदाय और सुरक्षा बलों के बीच भरोसे को मजबूत करने की पहल की।
सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रिय योगदान
30 जून 2013 को सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सैयद अता हसनैन सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर वे लगातार अपनी विशेषज्ञ राय देते रहे हैं। वर्ष 2018 में उन्हें सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था।
इसके बाद वर्ष 2020 में उन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का सदस्य बनाया गया। अपने सैन्य करियर के दौरान उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं।



