DroneTechnology – यूक्रेन युद्ध से उभरते तकनीकी बदलावों पर राहुल गांधी की टिप्पणी
DroneTechnology – लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आधुनिक युद्ध और वैश्विक तकनीकी बदलावों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। तिरुवनंतपुरम स्थित टेक्नोपार्क में आईटी क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि युद्ध के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रोन और इलेक्ट्रिक आधारित तकनीकें अब पारंपरिक सैन्य प्रणालियों को चुनौती दे रही हैं। उनके अनुसार, आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन की भूमिका इतनी प्रभावशाली हो गई है कि कई मामलों में पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन पर आधारित तकनीकें अप्रासंगिक होती जा रही हैं। राहुल गांधी ने इस बदलाव को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बताया और कहा कि आने वाले समय में तकनीकी प्रतिस्पर्धा वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की बदलती भूमिका
राहुल गांधी ने कहा कि यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है और यह आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को बदल रहा है। उनके मुताबिक, कई परिस्थितियों में ड्रोन की सर्कुलर मोशन तकनीक पारंपरिक इंजन आधारित प्रणालियों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि युद्ध में इस्तेमाल हो रही नई तकनीकों ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में सैन्य क्षमता केवल हथियारों की संख्या से नहीं बल्कि तकनीकी दक्षता से तय होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के कई देश अब रक्षा क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और ऑप्टिकल तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव का असर केवल युद्ध तक सीमित नहीं है बल्कि यह औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। उनके अनुसार, जो देश इन तकनीकों में आगे होंगे, वही भविष्य में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल करेंगे।
तकनीकी क्षेत्रों में चीन की मजबूत पकड़
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि वर्तमान समय में बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर और ऑप्टिक्स जैसी कई महत्वपूर्ण तकनीकों पर चीन का मजबूत प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि चीन ने पिछले वर्षों में एक बेहद प्रभावशाली औद्योगिक उत्पादन प्रणाली विकसित की है, जिसके कारण वह वैश्विक निर्माण क्षेत्र में अग्रणी बन गया है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चीन की औद्योगिक व्यवस्था काफी हद तक केंद्रीकृत और नियंत्रित प्रकृति की है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था से अलग है। उनके अनुसार, भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाते हुए एक संतुलित और पारदर्शी औद्योगिक ढांचा तैयार करे। ऐसा करने से भारत न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उत्पादन बनाम उपभोग पर वैश्विक परिदृश्य
राहुल गांधी ने वैश्विक आर्थिक ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के कई बड़े देश आज उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था में अधिक सक्रिय हैं, जबकि वास्तविक रोजगार उत्पादन क्षेत्र में पैदा होते हैं। उनके अनुसार, चीन ने निर्माण और उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाकर बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर तैयार किए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत समेत कई देशों में आईटी और सेवा क्षेत्र का विस्तार हुआ है, लेकिन दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए मजबूत उत्पादन तंत्र का होना भी उतना ही जरूरी है। राहुल गांधी के अनुसार, भारत को अपनी औद्योगिक नीतियों में सुधार करते हुए उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भारत के लिए अवसर
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि तकनीकी बदलावों के इस दौर में भारत के पास आगे बढ़ने का अवसर मौजूद है। उन्होंने कहा कि अगर सही नीतियां और दीर्घकालिक योजना अपनाई जाए तो भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई ऊर्जा आधारित तकनीकों में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।
उनके अनुसार, आंतरिक दहन इंजन से इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी आधारित प्रणालियों की ओर बदलाव एक बड़ा औद्योगिक परिवर्तन है। भारत इस बदलाव को बड़े पैमाने पर अपनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि यदि देश इस दिशा में तेजी से काम करे तो इससे लाखों नए रोजगार भी पैदा हो सकते हैं और भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
घरेलू उद्योग और व्यापार मॉडल पर सवाल
राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य में भारत के कुछ बड़े कॉरपोरेट समूहों के व्यापार मॉडल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देश में कई बड़े व्यवसाय ऐसे हैं जो मुख्य रूप से उत्पादों की बिक्री पर केंद्रित हैं, जबकि उत्पादन गतिविधियों को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल रहा है।
उनका कहना था कि भारत को ऐसी आर्थिक सोच विकसित करनी होगी जिसमें निर्माण और उत्पादन को अधिक महत्व दिया जाए। इससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और देश की आर्थिक संरचना अधिक संतुलित बन सकेगी। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था ही दीर्घकालिक रोजगार और औद्योगिक विकास का आधार बन सकती है।



