KhameneiOperation – खामेनेई को निशाना बनाने की योजना पर इस्राइल का बड़ा खुलासा
KhameneiOperation – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने दावा किया है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को निशाना बनाने का निर्णय पिछले वर्ष नवंबर में ही लिया जा चुका था। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह फैसला उस समय एक गोपनीय सुरक्षा बैठक के दौरान किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल थे। बताया गया कि उस समय इस रणनीति को एक दीर्घकालिक सैन्य योजना के रूप में तैयार किया गया था।

उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक में तय हुआ लक्ष्य
रक्षा मंत्री काट्ज ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि पिछले वर्ष नवंबर में हुई एक अत्यंत गोपनीय बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई थी। उनके मुताबिक बैठक में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरानी नेतृत्व को लेकर एक विशेष रणनीतिक लक्ष्य निर्धारित किया था।
काट्ज ने बताया कि उस बैठक में सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे और संभावित विकल्पों पर विस्तार से विचार किया गया था। उनका कहना था कि उस समय क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और ईरान की सैन्य गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।
मूल योजना में 2026 तक की समयसीमा
रिपोर्ट के अनुसार इस ऑपरेशन को शुरू में लगभग छह महीने बाद यानी 2026 के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। रणनीतिक योजना के तहत इस अवधि में खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य तैयारी को अंतिम रूप देने का प्रस्ताव था।
हालांकि बाद में परिस्थितियों के बदलने के कारण इस योजना की समयसीमा में संशोधन किया गया। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार ऐसे अभियानों में समय और परिस्थितियों के आधार पर रणनीति में बदलाव सामान्य बात मानी जाती है।
ईरान की आंतरिक स्थिति के बाद बदली रणनीति
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के भीतर बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता ने इस्राइल की रणनीति को प्रभावित किया। कहा गया कि तेहरान में बढ़ते दबाव के कारण इस्राइल को आशंका थी कि क्षेत्र में तनाव अचानक बढ़ सकता है।
इसी कारण इस ऑपरेशन की समयसीमा को आगे बढ़ाकर जनवरी के आसपास सक्रिय करने का निर्णय लिया गया। बताया जाता है कि इस बदलाव की जानकारी वाशिंगटन के साथ भी साझा की गई थी, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई फैसले अमेरिका और इस्राइल के बीच समन्वय के साथ लिए जाते हैं।
सैन्य अभियानों का हिस्सा बताया गया ऑपरेशन
रिपोर्टों में कहा गया है कि यह कार्रवाई शनिवार को शुरू किए गए दो बड़े सैन्य अभियानों का हिस्सा थी, जिन्हें ऑपरेशन रोरिंग लायन और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया। इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं और रणनीतिक ठिकानों को कमजोर करना बताया गया है।
इस्राइल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों से उत्पन्न संभावित खतरे को कम करना है। इसके साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बनाए रखने को भी इस रणनीति का हिस्सा बताया गया।
तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में हवाई हमले तेज
इन घटनाओं के बाद इस्राइल रक्षा बलों ने ईरान के भीतर कई स्थानों पर हवाई हमलों की पुष्टि की है। गुरुवार को सेना की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि तेहरान क्षेत्र में हमलों की 12वीं लहर पूरी की जा चुकी है।
इन हमलों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों, सैन्य ढांचे और कुछ रणनीतिक केंद्रों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य उन संरचनाओं को कमजोर करना है जिनका उपयोग सैन्य गतिविधियों के लिए किया जाता है।
अलबरज प्रांत में प्रमुख ठिकाने पर हमला
रिपोर्ट के अनुसार अलबरज प्रांत में स्थित एक विशेष इकाई के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया। इस इकाई को ईरान की आंतरिक सुरक्षा संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और यह विभिन्न सुरक्षा बलों के संचालन का समन्वय करती है।
इस्राइली वायु सेना ने बताया कि हमलों के दौरान बासिज अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा ढांचों से जुड़े कुछ ठिकानों को भी लक्ष्य बनाया गया। साथ ही हथियारों के भंडारण और उत्पादन से जुड़े कई स्थानों पर भी कार्रवाई की गई।
क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कई देशों और संगठनों ने इस संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया है।



