IranConflict – दिल्ली में रायसीना डायलॉग में ईरान के उप विदेश मंत्री का कड़ा बयान
IranConflict – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के उप-विदेश मंत्री डॉ. सईद खतीबजादेह ने अमेरिका और इस्राइल की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर हमले जारी रहते हैं तो तेहरान उन सभी स्थानों को निशाना बनाने के लिए मजबूर होगा, जहां से अमेरिकी सैन्य कार्रवाई शुरू की जा रही है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

संघर्ष को बताया ईरान के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा
डॉ. खतीबजादेह ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त रणनीति को ईरान हल्के में नहीं ले सकता। उनके अनुसार यह केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि ईरान के अस्तित्व को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश की संप्रभुता और सुरक्षा पर खतरा मंडराता है तो उसके पास अपनी रक्षा के लिए कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस संघर्ष को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मरक्षा से जुड़ा प्रश्न मानता है। उनके शब्दों में, ईरान किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को तैयार है।
ट्रंप के बयान पर ईरानी मंत्री का तीखा जवाब
कार्यक्रम के दौरान डॉ. खतीबजादेह ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की भूमिका के बिना ईरान अपना नया सुप्रीम नेता नहीं चुन सकता। इस पर ईरानी उप-विदेश मंत्री ने कड़ा तंज कसते हुए कहा कि जो नेता न्यूयॉर्क शहर के मेयर के चयन में भी सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकते, वे ईरान की राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में इस तरह की टिप्पणी औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाती है। खतीबजादेह के अनुसार ईरान की राजनीतिक व्यवस्था और नेतृत्व का फैसला पूरी तरह ईरानी जनता और उसकी संवैधानिक संस्थाओं का अधिकार है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप
ईरानी उप-विदेश मंत्री ने अमेरिका और इस्राइल की सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक मानदंडों के खिलाफ बताया। उन्होंने दावा किया कि ईरान की ओर से किसी प्रकार का उकसावा नहीं दिया गया था, फिर भी उसके खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर ईरान को निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार इस सवाल का जवाब अमेरिकी प्रशासन के अलग-अलग अधिकारियों से अलग-अलग तरीके से मिलता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस संघर्ष के पीछे वास्तविक कारण कुछ और हैं। खतीबजादेह ने कहा कि सत्ता की राजनीति और क्षेत्रीय वर्चस्व की सोच इस टकराव को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है।
क्षेत्रीय राजनीति और ‘ग्रेटर इस्राइल’ की अवधारणा पर टिप्पणी
अपने भाषण में उन्होंने इस्राइल की उस सोच की भी आलोचना की, जिसे उन्होंने ‘ग्रेटर इस्राइल’ की अवधारणा से जोड़ा। उनके मुताबिक दशकों से यह विचार क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करता रहा है और इससे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि ईरान को निशाना बनाने की कोशिशें इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात इसी दिशा में आगे बढ़ते हैं तो फारस की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को समाप्त करने के लिए ईरान को कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और वैश्विक चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। हाल के महीनों में कई घटनाओं और बयानों ने इस संघर्ष को और अधिक जटिल बना दिया है।
दिल्ली में रायसीना डायलॉग जैसे मंच पर ईरानी नेतृत्व की यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत मानी जा रही है कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कूटनीतिक प्रयास इस बढ़ते तनाव को कम करने में कितने सफल होते हैं।



