TelecomPolicy – वोडाफोन आइडिया में 49% से अधिक हिस्सेदारी नहीं बढ़ाएगी सरकार
TelecomPolicy – केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वोडाफोन आइडिया में अपनी हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 27 फरवरी को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि सरकार कंपनी में इक्विटी के स्तर पर मौजूद है, लेकिन प्रबंधन में उसकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने दोहराया कि एजीआर बकाया को इक्विटी में बदलने के बाद सरकार की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत पर है और यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है।

सरकार की भूमिका पर स्पष्ट संदेश
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दूरसंचार क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, न कि कंपनियों के दैनिक संचालन में दखल देना। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी की वृद्धि और रणनीतिक फैसले प्रबंधन को ही लेने होंगे। सरकार केवल नियामकीय और नीतिगत ढांचे के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। उनके अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में कंपनी की स्थिति पहले से बेहतर दिखाई दे रही है।
एजीआर बकाया पर कैबिनेट का निर्णय
यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वोडाफोन आइडिया के लगभग 87,695 करोड़ रुपये के एजीआर बकाया को फ्रीज करने का निर्णय लिया है। साथ ही वित्त वर्ष 2032 से 2041 तक के पुनर्भुगतान कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के बाद एजीआर बकाया का पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में है। दूरसंचार विभाग आगामी वर्षों के लिए इस आकलन को अंतिम रूप देने में जुटा है। इससे कंपनी को वित्तीय दबाव कम करने में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
शेयर बाजार में दिनभर का उतार-चढ़ाव
शुक्रवार को बीएसई में वोडाफोन आइडिया के शेयर 10.85 रुपये पर खुले। कारोबार के दौरान हल्की गिरावट देखने को मिली और भाव 10.75 रुपये तक पहुंच गया। दिन में शेयर का उच्चतम स्तर 10.94 रुपये दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी रुख स्पष्ट होने के बाद निवेशकों की नजर अब कंपनी की परिचालन रणनीति और कर्ज प्रबंधन पर रहेगी।
छह महीने में उल्लेखनीय बढ़त
पिछले छह महीनों में कंपनी के शेयरों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इस अवधि में शेयर मूल्य में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं एक वर्ष के भीतर लगभग 38 प्रतिशत का उछाल आया है। कंपनी का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 12.80 रुपये और न्यूनतम स्तर 6.12 रुपये रहा है। मौजूदा समय में कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 1.16 लाख करोड़ रुपये आंका गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
विश्लेषकों का कहना है कि एजीआर बकाया के पुनर्गठन और सरकार की स्पष्ट हिस्सेदारी सीमा से अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई है। हालांकि दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और पूंजीगत निवेश की जरूरत अभी भी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कंपनी की नेटवर्क विस्तार योजनाएं और ग्राहक आधार बढ़ाने की रणनीति उसके वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।
सरकार के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि वह नियामकीय सहयोग तक सीमित रहेगी और कंपनी के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करेगी। ऐसे में बाजार और निवेशक अब कंपनी के प्रबंधन की अगली चाल पर नजर बनाए हुए हैं।



