Tharoor Political Stand: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी लाइन और राष्ट्रीय हित पर अपनी बात रखी
Tharoor Political Stand: केरल लिटरेचर फेस्टिवल के एक सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी राजनीतिक निष्ठा और पार्टी के सिद्धांतों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में संसद के भीतर कभी भी (Congress Party Discipline) का उल्लंघन नहीं किया है। थरूर ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक रूप से उनकी एकमात्र वैचारिक असहमति ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर थी, जिस पर उन्होंने एक सख्त और सैद्धांतिक स्टैंड लिया था। थरूर ने बताया कि वह आज भी अपने उस पुराने फैसले पर बिना किसी पछतावे के पूरी मजबूती के साथ कायम हैं।

पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों की अटकलों पर विराम
पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि शशि थरूर और कांग्रेस आलाकमान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विशेष रूप से कोच्चि के एक हालिया कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा उन्हें कथित तौर पर महत्व न दिए जाने और केरल के स्थानीय नेताओं द्वारा (Internal Party Conflict) की खबरों ने काफी तूल पकड़ा था। हालांकि, थरूर ने इन सभी अटकलों को दरकिनार करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे व्यक्तिगत उपेक्षा के बजाय वैचारिक और नीतिगत राजनीति में अधिक विश्वास रखते हैं।
पहलगाम हमले और पाकिस्तान के विरुद्ध सख्त रुख
आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए शशि थरूर ने अतीत की एक महत्वपूर्ण घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद उन्होंने एक लेखक के तौर पर (Foreign Policy Strategy) का समर्थन करते हुए अखबार में लेख लिखा था। उस समय उन्होंने मांग की थी कि भारत को इस हमले को बिना सजा दिए नहीं छोड़ना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए। थरूर का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में देश को अपनी ताकत का अहसास कराना जरूरी होता है।
सैन्य कार्रवाई और देश के विकास पर केंद्रित विचार
पाकिस्तान के साथ संबंधों पर बात करते हुए थरूर ने एक संतुलित दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत का प्राथमिक लक्ष्य आर्थिक विकास और उन्नति होना चाहिए, इसलिए हमें पाकिस्तान के साथ किसी लंबे संघर्ष में नहीं फंसना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को केवल (Targeted Military Action) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो विशिष्ट आतंकवादी ठिकानों तक सीमित हो। थरूर ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि उनके लिए यह सुखद आश्चर्य था कि भारत सरकार ने अंततः वही कदम उठाए जिनकी उन्होंने पहले सिफारिश की थी।
राष्ट्रीय हित और नेहरू के विजन का उल्लेख
भाषण के दौरान थरूर ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक सवाल “अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?” को याद किया। उन्होंने कहा कि जब भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और सुरक्षा की बात आती है, तो (National Interest Supremacy) सबसे ऊपर होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि एक बेहतर राष्ट्र के निर्माण के दौरान अलग-अलग राजनीतिक दलों की विचारधाराओं में अंतर हो सकता है और तीखी बहसें भी हो सकती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सुरक्षा और गरिमा के लिए सबको एकजुट होना अनिवार्य है।
भारतीय राजनीति में थरूर की विशिष्ट कार्यशैली
शशि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि एक सांसद और अंतरराष्ट्रीय स्तर के राजनयिक के रूप में उनकी भूमिका हमेशा राष्ट्र निर्माण की रही है। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद लोकतंत्र की खूबसूरती है, लेकिन (Democratic Values of India) का सम्मान करना हर राजनेता का कर्तव्य है। थरूर के इस विस्तृत स्पष्टीकरण से यह संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर रहकर भी अपनी स्वतंत्र सोच और बौद्धिक विमर्श को जारी रखना चाहते हैं, ताकि जनहित के मुद्दों पर कभी समझौता न हो।



