Syria Aleppo Ceasefire 2026: अलेप्पो में तीन दिनों की खूनी जंग के बाद सीजफायर का हुआ ऐलान, क्या अब लौटेगी शांति..
Syria Aleppo Ceasefire 2026: सीरिया के ऐतिहासिक शहर अलेप्पो में पिछले तीन दिनों से जारी सरकारी सेना और कुर्द लड़ाकों के बीच का भीषण संघर्ष फिलहाल थम गया है। शुक्रवार को सीरियाई रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की, जिससे खंडहर बनते शहर को थोड़ी राहत मिली है। इस हिंसा ने न केवल इमारतों को मलबे में तब्दील किया, बल्कि (Civilian displacement in Syria) की एक नई मानवीय त्रासदी को भी जन्म दिया है। हजारों लोग कड़ाके की ठंड में अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

सुबह 3 बजे से प्रभावी हुआ शांति का समझौता
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह युद्धविराम शेख मकसूद, अशरफीह और बानी जैद जैसे विवादित इलाकों में सुबह 3 बजे से लागू कर दिया गया है। समझौते के तहत (Armed groups evacuation) के लिए विद्रोहियों को छह घंटे का एक छोटा सा ‘विंडो’ दिया गया है। इस समय सीमा के भीतर लड़ाकों को अपने मोर्चे छोड़कर तय रास्तों से बाहर निकलना होगा। अलेप्पो के गवर्नर अजाम अल-गरीब ने सुरक्षा बलों के साथ इन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है।
हल्के हथियारों के साथ सुरक्षित गलियारे की अनुमति
समझौते की शर्तों के मुताबिक, शहर छोड़ने वाले कुर्द लड़ाकों को अपने साथ केवल निजी हल्के हथियार ले जाने की इजाजत दी गई है। उन्हें एक सुरक्षित सुरक्षा घेरे में देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से की ओर भेजा जाएगा। यह इलाका कुर्द नेतृत्व वाली (SDF control zones) के अधीन आता है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया पर सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे समझौते की स्थिरता पर कुछ सवालिया निशान बने हुए हैं।
अमेरिका ने जताई खुशी और बढ़ाया समर्थन
सीरिया में तैनात अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने इस युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे एक सकारात्मक कदम बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्होंने सीरियाई सरकार और कुर्द नेताओं के संयम की सराहना की। अमेरिका अब इस कोशिश में लगा है कि (Humanitarian aid access) को सुचारू बनाने के लिए इस छह घंटे की समय सीमा को और बढ़ाया जाए। बैरक ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन इस क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों के साथ निरंतर संवाद कर रहा है।
साढ़े तीन लाख की आबादी पर विस्थापन का साया
मंगलवार से शुरू हुई इस खूनी जंग के नतीजे बेहद डरावने रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लगभग 1,42,000 लोग बेघर हो चुके हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर (Targeting civilian infrastructure) जैसे अस्पतालों और एंबुलेंस पर हमला करने के संगीन आरोप लगाए हैं। कुर्द बलों के अनुसार उनके इलाकों में 12 निर्दोष नागरिक मारे गए, जबकि सरकारी पक्ष ने 9 लोगों की मौत की पुष्टि की है। यह तबाही अलेप्पो के आधुनिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बनकर उभरी है।
सेना में विलय के विवाद ने सुलगाई हिंसा की आग
इस ताजा संघर्ष की जड़ें उस राजनीतिक गतिरोध में छिपी हैं, जो केंद्र सरकार और एसडीएफ के बीच सेना में विलय को लेकर चल रहा है। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा की सरकार और कुर्द बलों के बीच (Syria political transition) को लेकर पिछले साल एक समझौता हुआ था, लेकिन उसे जमीनी स्तर पर लागू करने में दोनों पक्ष नाकाम रहे। बातचीत की मेज पर आई इस कड़वाहट ने ही सड़कों पर हथियारों को बोलने का मौका दे दिया।
ट्रंप प्रशासन का बढ़ता कूटनीतिक दबाव
सीरिया की इस उलझी हुई बिसात पर अब अमेरिका का नया रुख भी प्रभाव डाल रहा है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन कुर्द बलों पर इस बात का लगातार दबाव बना रहा है कि वे सरकार के साथ हुए समझौतों को पूरी तरह स्वीकार करें। (US foreign policy in Syria) में आए इस बदलाव ने कुर्द नेतृत्व को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। वाशिंगटन चाहता है कि सीरिया में सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी बड़े सैन्य टकराव के पूरा हो जाए, ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
क्या टिकाऊ साबित होगा यह युद्धविराम?
अलेप्पो में फिलहाल शांति है, लेकिन यह शांति कितनी लंबी चलेगी, इसे लेकर संशय बरकरार है। यदि (Syrian ceasefire durability) को सुनिश्चित करना है, तो दोनों पक्षों को विश्वास बहाली के उपाय करने होंगे। हजारों विस्थापित लोगों की घर वापसी और घायलों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाना इस समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। विश्व समुदाय की नजरें अब दमिश्क और अलेप्पो के बीच होने वाले अगले कूटनीतिक कदम पर टिकी हैं।



