Uttarakhand Congress Strategy Meeting 2026: उत्तराखंड कांग्रेस में नई जान फूंकने की तैयारी, कुमारी सैलजा की एंट्री से बदलेगा सियासी समीकरण
Uttarakhand Congress Strategy Meeting 2026: उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है क्योंकि लंबे अंतराल के बाद प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा देहरादून पहुंच चुकी हैं। उनके इस दौरे का मुख्य उद्देश्य राज्य के वर्तमान राजनीतिक मिजाज को समझना और (Congress Organizational Activities in Uttarakhand) को नई दिशा देना है। बृहस्पतिवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। कुमारी सैलजा की मौजूदगी यह संकेत देती है कि आलाकमान अब उत्तराखंड में पार्टी के भीतर चल रही सुस्ती को खत्म करने के मूड में है।

पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक और रणनीति पर जोर
कांग्रेस मुख्यालय में होने वाली इस बैठक का मुख्य केंद्र ‘पॉलीटिकल अफेयर कमेटी’ है, जिसमें प्रदेश के तमाम दिग्गज नेता शिरकत कर रहे हैं। इस बैठक में न केवल संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विचार होगा, बल्कि (Political Strategy Development) के तहत आगामी चुनावों और जन-आंदोलनों की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। पार्टी के भीतर समन्वय बढ़ाने और जनता के मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाने के लिए कुमारी सैलजा वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में विस्तृत चर्चा कर रही हैं।
नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन पर अहम चर्चा
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्पष्ट किया है कि इस दौरे का एक बड़ा एजेंडा प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी का गठन करना है। लंबे समय से कार्यकर्ता (Reforming Congress State Executive) का इंतजार कर रहे हैं ताकि जिलों और ब्लॉकों में जिम्मेदारी तय की जा सके। नई टीम के चयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना कुमारी सैलजा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद जल्द ही पदाधिकारियों की नई सूची जारी कर दी जाएगी।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की मांग पर अड़ी कांग्रेस
बैठक के एजेंडे में केवल संगठन ही नहीं, बल्कि राज्य के ज्वलंत मुद्दे भी शामिल हैं। प्रदेश भर में अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग (Justice for Ankita Bhandari Movement) के लिए चल रहे आंदोलन को और तेज करने पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में वायरल हुए नए ऑडियो और बड़े नेताओं के नाम छिपाने के आरोपों ने इस मामले को फिर से गरमा दिया है। कांग्रेस इसे एक बड़ा जन-मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, ताकि पहाड़ की बेटियों की सुरक्षा का सवाल हर घर तक पहुंचे।
मनरेगा और बेरोजगारी जैसे जनहित के मुद्दों पर विमर्श
संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ पार्टी अब केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी प्रहार करने की योजना बना रही है। बैठक में मनरेगा योजना (MGNREGA Scheme Concerns) को कथित तौर पर समाप्त करने की कोशिशों और बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की गई। कांग्रेस का मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली योजनाओं पर प्रहार पहाड़ के युवाओं और मजदूरों के साथ धोखा है। इन मुद्दों को लेकर पार्टी आने वाले दिनों में बड़े विरोध प्रदर्शनों का खाका खींच रही है।
दिग्गजों का जमावड़ा: एकजुटता दिखाने की कोशिश
इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड कांग्रेस के सभी ‘भीष्म पितामह’ एक साथ नजर आ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत (Congress Senior Leadership Unity) जैसे बड़े चेहरों की मौजूदगी यह संदेश देने के लिए है कि पार्टी एकजुट है। गुटबाजी की खबरों के बीच इन नेताओं का एक मंच पर बैठना संगठन के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है। कुमारी सैलजा सभी धड़ों के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रही हैं।
चुनाव प्रबंधन और प्रचार समिति की नई योजनाएं
बैठक में आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह अपनी-अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। पार्टी अब डिजिटल और (Election Campaign Management Tactics) के माध्यम से घर-घर पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही है। कुमारी सैलजा का अनुभव और केंद्रीय नेतृत्व का मार्गदर्शन उत्तराखंड में पार्टी को एक बार फिर से मुख्यधारा में लाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
देवभूमि की जनता की टोह लेने की कवायद
कुमारी सैलजा का यह दौरा केवल नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए वे जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश भी कर रही हैं। उत्तराखंड (Understanding State Political Mood) के वर्तमान परिदृश्य में जनता किन बदलावों की उम्मीद कर रही है, इसे समझकर ही पार्टी अपनी भविष्य की नीतियां तय करेगी। पहाड़ के संघर्षों और भावनाओं को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाकर कांग्रेस राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की जद्दोजहद में जुट गई है।



