Lashkar-e-Taiba Bengaluru Jail Conspiracy: जेल से रची गई थी बंगलूरू को दहलाने की साजिश, डॉक्टर और पुलिसकर्मी भी निकले मददगार
Lashkar-e-Taiba Bengaluru Jail Conspiracy: बंगलूरू के केंद्रीय कारागार, परप्पना अग्रहारा में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने एक खौफनाक साजिश रची थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के खुलासे के अनुसार, जेल में बंद दहशतगर्दों ने न केवल अपने साथियों को भगाने की योजना बनाई थी, बल्कि शहर में सिलसिलेवार धमाके करने की (Terrorist recruitment) कोशिश भी की थी। यह साजिश तब और भी खतरनाक हो गई जब जेल प्रशासन के ही कुछ लोग आतंकियों के मददगार बन गए।

डॉक्टर और पुलिसकर्मी की गद्दारी का खुलासा
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला (Lashkar-e-Taiba Bengaluru Jail Conspiracy) नाम डॉ. नागराज एस का है, जो जेल अस्पताल में मनोचिकित्सक के रूप में तैनात थे। जांच में सामने आया कि उन्होंने पैसों के लालच में प्रमुख आतंकी टी नसीर तक मोबाइल फोन पहुंचाया था। इसी फोन का इस्तेमाल (Clandestine communication) के लिए किया गया। वहीं, पुलिस विभाग के चान पाशा ए ने भी रिश्वत लेकर आतंकियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद की। इन सफेदपोश मददगारों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया था।
एनआईए का दूसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल
एनआईए ने इस मामले में अनीस फातिमा समेत तीन और लोगों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है। अनीस फातिमा, फरार आतंकी जुनैद अहमद की मां है, जिसने जेल में रसद और धन मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसने (Logistics support) के साथ-साथ हथगोले और वॉकी-टॉकी जैसे उपकरण जुटाने में भी मदद की। एजेंसी ने बताया कि इन आरोपियों ने आतंकियों को विदेश भगाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का भी इंतजाम किया था।
टी नसीर और 2008 बम धमाकों का कनेक्शन
साजिश का मास्टरमाइंड टी नसीर, 2008 के बंगलूरू सिलसिलेवार बम धमाकों का मुख्य आरोपी है। वह जेल में रहते हुए अन्य अपराधियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथी बना रहा था। जांच में पाया गया कि (Radicalization in prisons) एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जहां सजायाफ्ता आतंकी आम अपराधियों को आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार कर रहे हैं। एनआईए ने यूएपीए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत इन पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और भविष्य की चुनौतियां
एनआईए ने अब तक इस मामले में कई आरोपियों को नामजद किया है, जिसमें रवांडा से प्रत्यर्पित किया गया एक आरोपी भी शामिल है। यह मामला दिखाता है कि कैसे आतंकी संगठन (Global terror network) का इस्तेमाल कर भारत के भीतर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। बंगलूरू पुलिस और एनआईए के साझा प्रयासों ने एक बड़ी तबाही को टाल दिया है, लेकिन जेलों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



