ScreenTime – उम्र के अनुसार कितना स्क्रीन टाइम सही, जानिए विशेषज्ञों की सलाह…
ScreenTime – मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पढ़ाई, नौकरी, मनोरंजन और सोशल मीडिया के कारण अधिकांश लोग दिन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने बिताते हैं। हालांकि जरूरत से अधिक स्क्रीन का इस्तेमाल आंखों में थकान, सिरदर्द, नींद की गड़बड़ी, मानसिक तनाव और शारीरिक गतिविधियों में कमी जैसी समस्याओं की वजह बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन उम्र और जरूरत के अनुसार इसका संतुलित उपयोग करना जरूरी है।

छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन से दूरी बेहतर
विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से लेकर दो वर्ष तक के बच्चों के मस्तिष्क का विकास सबसे तेज गति से होता है। इसलिए इस उम्र में मोबाइल, टीवी या टैबलेट की स्क्रीन से जितना संभव हो दूरी बनाए रखना बेहतर माना जाता है। यदि किसी आवश्यक कारण, जैसे वीडियो कॉल, के लिए स्क्रीन का उपयोग करना पड़े तो वह भी सीमित समय के लिए और माता-पिता की निगरानी में होना चाहिए। इससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर अनावश्यक प्रभाव पड़ने की संभावना कम रहती है।
2 से 12 वर्ष तक संतुलित उपयोग जरूरी
दो से पांच वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रतिदिन लगभग 30 मिनट से एक घंटे तक स्क्रीन टाइम पर्याप्त माना जाता है। इस दौरान बच्चों को केवल उनकी उम्र के अनुरूप और शैक्षणिक या उपयोगी सामग्री ही दिखाई जानी चाहिए। वहीं छह से बारह वर्ष के बच्चों में पढ़ाई के कारण स्क्रीन का उपयोग बढ़ सकता है, लेकिन मनोरंजन के लिए अतिरिक्त स्क्रीन टाइम सीमित रखना बेहतर है। साथ ही बच्चों को आउटडोर खेल, किताबें पढ़ने और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
किशोरों में बढ़ती स्क्रीन आदत पर रखें नजर
13 से 18 वर्ष की उम्र में ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया और डिजिटल मनोरंजन के कारण स्क्रीन का उपयोग काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से एकाग्रता, नींद और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए किशोरों के लिए पढ़ाई और आवश्यक कार्यों के अलावा स्क्रीन उपयोग की समय सीमा तय करना और नियमित ब्रेक लेना फायदेमंद माना जाता है।
वयस्कों और बुजुर्गों के लिए भी जरूरी है संतुलन
18 से 60 वर्ष के लोगों में नौकरी और डिजिटल कार्यों के कारण कई घंटे स्क्रीन के सामने बिताना सामान्य बात है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, गर्दन और पीठ में दर्द तथा थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। इसके तहत हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने से आंखों को आराम मिलता है। बुजुर्गों को भी लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचना चाहिए और दिनचर्या में हल्की एक्सरसाइज, बातचीत तथा अन्य शारीरिक गतिविधियों को शामिल करना चाहिए।
स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाना है सबसे बेहतर उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन टाइम का प्रभाव केवल समय पर नहीं, बल्कि उसके उपयोग के तरीके पर भी निर्भर करता है। सोने से ठीक पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना, बीच-बीच में ब्रेक लेना, पर्याप्त नींद लेना और रोजाना कुछ समय बिना किसी डिजिटल डिवाइस के बिताना बेहतर स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है। यदि स्क्रीन के कारण आंखों, नींद या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।