GoldLoan – नए नियमों से बदल सकता है गोल्ड लोन चुकाने का तरीका
GoldLoan– सोने के आभूषण गिरवी रखकर कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले समय में नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश का Gold Loan बाजार एक नए ढांचे की ओर बढ़ रहा है। प्रस्तावित बदलावों का असर न केवल लोन लेने और चुकाने की प्रक्रिया पर पड़ेगा, बल्कि वित्तीय संस्थानों के लिए बकाया ऋण और NPA के जोखिम में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।

Bullet Payment से EMI मॉडल की ओर बढ़ रहा बाजार
अब तक Non-Banking Financial Companies (NBFC) से Gold Loan लेने वाले अधिकांश ग्राहक Bullet Payment विकल्प चुनते थे। इस व्यवस्था में कर्ज की अवधि के दौरान मासिक किस्त नहीं देनी पड़ती थी और तय अवधि पूरी होने पर मूलधन तथा ब्याज की पूरी राशि एक साथ जमा करनी होती थी। ICRA के अनुसार, अब धीरे-धीरे इस मॉडल की जगह नियमित EMI आधारित भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे ग्राहकों को हर महीने किस्त चुकानी होगी और भुगतान का तरीका पहले की तुलना में अलग होगा।
NPA बढ़ने की आशंका जताई गई
ICRA का मानना है कि भुगतान प्रणाली में इस बदलाव के शुरुआती दौर में कुछ ग्राहकों को नई व्यवस्था के अनुरूप खुद को ढालने में कठिनाई हो सकती है। इसी वजह से Gold Loan पोर्टफोलियो में NPA बढ़ने का जोखिम भी सामने आ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मई 2026 तक स्वर्ण आभूषण के बदले दिए गए कुल बकाया कर्ज का आकार बढ़कर 5.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2026 के दौरान इस श्रेणी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आने वाले वर्षों में बाजार के विस्तार का अनुमान
ICRA के आकलन के अनुसार, बैंकों और NBFC का संयुक्त Gold Loan कारोबार वित्त वर्ष 2026-27 से 2027-28 के बीच 30 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में करीब 18 लाख करोड़ रुपये का यह बाजार मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर सकता है। साथ ही अगले वित्त वर्ष तक Gold Loan Segment में NBFC की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 23 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान भी व्यक्त किया गया है।
आम ग्राहकों पर क्या पड़ सकता है असर
नई भुगतान व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो पहले एकमुश्त भुगतान की सुविधा का उपयोग करते थे। अब उन्हें हर महीने EMI के लिए अपने मासिक बजट की अलग से योजना बनानी पड़ सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित किस्तों के कारण बकाया मूलधन धीरे-धीरे कम होता रहेगा, जिससे सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़ा जोखिम भी सीमित रहेगा। यदि किसी ग्राहक द्वारा लोन का भुगतान नहीं किया जाता है, तो वित्तीय संस्थान नियमानुसार गिरवी रखे गए सोने की नीलामी कर अपनी राशि की वसूली कर सकते हैं। ऐसे में Gold Loan लेने से पहले नई शर्तों और भुगतान प्रणाली को अच्छी तरह समझना ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।