Maoist – धनबाद में एक करोड़ से अधिक का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार
Maoist– झारखंड पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एक करोड़ रुपये से अधिक के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस अभियान में उसके दो अन्य सहयोगियों को भी हिरासत में लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां तीनों से पूछताछ कर रही हैं और उनसे नक्सली नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

धनबाद के मनियाडीह क्षेत्र में हुई कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मिसिर बेसरा को मंगलवार शाम धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के मनियाडीह इलाके से गिरफ्तार किया गया। वह गिरिडीह जिले के हरलाडीह गांव का निवासी बताया जाता है। लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और सटीक सूचना मिलने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। अभियान के दौरान उसके साथ मौजूद दो अन्य माओवादियों को भी पकड़ लिया गया।
कई राज्यों में दर्ज हैं गंभीर मामले
पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा कई वर्षों से झारखंड सहित ओडिशा और अन्य राज्यों में नक्सली गतिविधियों से जुड़े अनेक मामलों में वांछित था। विभिन्न राज्यों की ओर से उस पर कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थीं और उसे संगठन के प्रमुख सक्रिय सदस्यों में गिना जाता था।
पूछताछ में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों से अलग-अलग स्तर पर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान नक्सली संगठन के नेटवर्क, गतिविधियों और अन्य सहयोगियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से उग्रवाद विरोधी अभियान को और मजबूती मिलेगी।
16 माओवादियों ने भी किया आत्मसमर्पण
इसी दिन झारखंड पुलिस के समक्ष 16 माओवादियों ने आत्मसमर्पण भी किया। पुलिस के अनुसार, इनमें संतोष महतो उर्फ बसुदेव दा उर्फ दिलीप भी शामिल है, जो 128 मामलों में वांछित था और जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में दो सब-जोनल कमेटी के सदस्य और दो एरिया कमेटी के पदाधिकारी भी शामिल हैं।
अभियान जारी रहने का दावा
झारखंड पुलिस ने कहा है कि राज्य में नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस का कहना है कि उग्रवादी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, आत्मसमर्पण की नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने के इच्छुक लोगों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अवसर भी दिया जा रहा है।