MedTech – मेडिकल सॉफ्टवेयर के लिए लागू हुईं नई गाइडलाइन, कंपनियों को मिली बड़ी राहत
MedTech – देश में मेडिकल सॉफ्टवेयर के सुरक्षित, पारदर्शी और मानकीकृत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मेडिकल डिवाइस सॉफ्टवेयर (MDSW) से संबंधित अंतिम गाइडलाइन लागू कर दी है। यह दिशा-निर्देश 21 जुलाई से प्रभावी हो चुके हैं। औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव रघुवंशी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, नई गाइडलाइन मेडिकल डिवाइस नियम-2017 (MDR-2017) के तहत मेडिकल सॉफ्टवेयर के नियमन को स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है, जिससे उद्योग और नियामक प्रक्रिया दोनों में अधिक स्पष्टता आएगी।

नियमों को किया गया अधिक स्पष्ट
नई गाइडलाइन में मेडिकल सॉफ्टवेयर की श्रेणी तय करने, उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों, आवश्यक दस्तावेजों तथा बाजार में आने के बाद निगरानी की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है। CDSCO ने सॉफ्टवेयर विकसित करने वाली कंपनियों, आयातकों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे लाइसेंस या मंजूरी के लिए आवेदन करते समय इन्हीं दिशा-निर्देशों का पालन करें। इसका उद्देश्य नियामक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।
कंपनियों को मिली महत्वपूर्ण सुविधा
नई व्यवस्था के तहत मेडिकल सॉफ्टवेयर में छोटे या सीमित तकनीकी बदलाव करने के लिए अब हर बार नया लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए Algorithm Change Protocol (ACP) की व्यवस्था लागू की गई है। इससे कंपनियां आवश्यक सुधार और अपडेट पहले की तुलना में अधिक सरल प्रक्रिया के माध्यम से कर सकेंगी। साथ ही परीक्षण लाइसेंस और व्यावसायिक लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया भी पहले से अधिक स्पष्ट और आसान बनाई गई है।
मेडिकल सॉफ्टवेयर की दो प्रमुख श्रेणियां
गाइडलाइन में मेडिकल सॉफ्टवेयर को दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है। पहला है Software in Medical Device (SiMD), जिसमें ऐसा सॉफ्टवेयर शामिल है जो किसी मेडिकल उपकरण का अभिन्न हिस्सा होता है और उसी के संचालन के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण के तौर पर पेसमेकर, इंसुलिन पंप या ग्लूकोज मॉनिटरिंग मशीन में इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर इसी श्रेणी में आता है। ऐसे सॉफ्टवेयर पर वही नियामक नियम लागू होंगे जो संबंधित मेडिकल डिवाइस पर लागू होते हैं।
स्वतंत्र रूप से काम करने वाले सॉफ्टवेयर भी शामिल
दूसरी श्रेणी Software as Medical Device (SaMD) की है। इसमें ऐसे सॉफ्टवेयर शामिल हैं जो किसी विशेष मेडिकल मशीन पर निर्भर नहीं होते और स्वतंत्र रूप से चिकित्सीय कार्य कर सकते हैं। उदाहरण के लिए एक्स-रे या अन्य मेडिकल इमेज का विश्लेषण करने वाले प्लेटफॉर्म, ईसीजी डेटा के आधार पर चिकित्सकीय सहायता देने वाले एप्लिकेशन या क्लाउड आधारित रोग विश्लेषण प्रणाली इस श्रेणी में आती हैं।
डिजिटल हेल्थ क्षेत्र को मिलेगा लाभ
देश में अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में AI आधारित मेडिकल सॉफ्टवेयर का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। जांच, रोग की निगरानी और उपचार संबंधी निर्णयों में इनकी भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, अब तक लागू नियम मुख्य रूप से पारंपरिक मेडिकल उपकरणों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, जिससे सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और आयातकों को कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। नई गाइडलाइन से इन अस्पष्टताओं को दूर करने में मदद मिलेगी और मेडिकल सॉफ्टवेयर के विकास, अनुमोदन तथा निगरानी की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।