NEETOnline – ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों की समीक्षा
NEETOnline- नीट परीक्षा को भविष्य में ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किए जाने की संभावनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर टास्क फोर्स की सिफारिशों का अध्ययन किया जाएगा। अदालत का मानना है कि पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा से ऑनलाइन प्रणाली की ओर बढ़ने के लिए केवल तकनीकी बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि परीक्षा की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए उपाय भी आवश्यक होंगे।

ऑनलाइन परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की जाती है, तो साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। अदालत ने संकेत दिया कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त तकनीकी प्रबंध तथा प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित करना जरूरी होगा। पीठ ने यह भी कहा कि इस बदलाव के दौरान नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशने होंगे।
याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
यह मामला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिका में 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द किए जाने और उससे जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। उन्होंने कहा कि इस समिति की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी और इसकी अध्यक्षता तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की समिति करेगी सुधारों पर काम
केंद्र सरकार के अनुसार, इस हाई पावर टास्क फोर्स में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति में नंदन नीलेकणि के अलावा इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा भी सदस्य हैं। सरकार का कहना है कि यह समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सुझाव तैयार कर रही है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है। इससे पहले भी अदालत के समक्ष कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने से संबंधित याचिका आई थी, जिस पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया गया था। उल्लेखनीय है कि पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा रद्द कर दी थी और बाद में 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है, जबकि परीक्षा प्रणाली में संभावित सुधारों को लेकर न्यायालय और केंद्र सरकार दोनों स्तर पर प्रक्रिया जारी है।