MPSCExam – महाराष्ट्र ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा पर उठे नए सवाल, विपक्ष ने मांगी जांच
MPSCExam- महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा एक बार फिर विवादों में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ कथित व्हाट्सएप चैट और तस्वीरों के आधार पर परीक्षा में पेपर लीक के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन दावों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर राज्य सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों से बढ़ी चर्चा
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे कथित संदेशों में दावा किया गया है कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 22 मार्च को आयोजित हुई थी, जबकि उससे दो दिन पहले यानी 20 मार्च को प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल व्हाट्सएप के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे थे। वायरल सामग्री में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित प्रश्नपत्र लाखों रुपये लेकर उपलब्ध कराया गया। साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
परीक्षा से पहले सवाल साझा होने का आरोप
वायरल चैट और तस्वीरों के आधार पर यह भी दावा किया जा रहा है कि परीक्षा से पहले कुल 78 प्रश्न कुछ लोगों तक पहुंचाए गए थे। आरोप है कि इन प्रश्नों का संबंध वास्तविक परीक्षा से था। सोशल मीडिया पर प्रसारित इन सामग्रियों को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन संबंधित एजेंसियों ने अभी तक इन दावों की सत्यता पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उससे जुड़े सवालों के प्रसारित होने और मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों संबंधी शिकायतें सामने आई हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा भर्ती प्रक्रिया पर कायम रहे।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि शिकायतों और कथित साक्ष्यों के सामने आने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर आरोप की निष्पक्ष जांच जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पूरे मामले में सरकार और संबंधित परीक्षा प्राधिकरण की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।