Protest – संसद मार्च से पहले अस्पताल से सोनम वांगचुक ने रखीं तीन प्रमुख शर्तें
Protest- संसद मार्च प्रस्तावित होने से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से एक सार्वजनिक संदेश जारी किया है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने बताया कि किन परिस्थितियों में वह अपना जारी अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। वांगचुक इस समय स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि उनका और उनके समर्थकों का कहना है कि अस्पताल में उनकी गतिविधियों पर भी सीमाएं लगाई गई हैं।

अनशन समाप्त करने के लिए तीन विकल्प बताए
अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने तीन स्पष्ट शर्तों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हालिया विवादों, विशेषकर पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, तो वह अनशन समाप्त कर सकते हैं। दूसरी स्थिति में उन्होंने कहा कि यदि उन्हें और अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों को संसद तक जाने दिया जाए तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद यह भरोसा दें कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा, तब भी वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। तीसरे विकल्प के रूप में उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या अन्य परिस्थितियों के चलते वह संसद नहीं पहुंच पाते हैं, तो विभिन्न दलों के सांसद अस्पताल आकर यही आश्वासन दें।
अस्पताल में भर्ती होने को लेकर अलग-अलग दावे
सोनम वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में उपचाराधीन हैं। उन्होंने और उनकी पत्नी ने अस्पताल में मौजूदगी को नजरबंदी जैसा बताया है तथा दावा किया है कि उनकी आवाजाही और संवाद की स्वतंत्रता सीमित है। दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष अलग है। सरकारी पक्ष का कहना है कि उन्हें अदालत के निर्देशों के अनुरूप जंतर-मंतर से हटाया गया था और आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
संसद मार्च को अनुमति नहीं, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
इसी बीच संसद का मानसून सत्र शुरू होने के साथ प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च का आह्वान किया है। दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है। सुरक्षा को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है तथा सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
शिक्षा सुधार की मांग बनी आंदोलन का केंद्र
यह आंदोलन शिक्षा प्रणाली में सुधार, परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और हाल के पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा और ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। वहीं प्रशासन सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए है। संसद सत्र के दौरान इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर ध्यान केंद्रित है।