ATM – एटीएम से पैसे न निकलें तो घबराएं नहीं, जानिए आरबीआई के नियम और आपका अधिकार
ATM- आज के समय में नकदी की जरूरत पड़ने पर अधिकांश लोग एटीएम का सहारा लेते हैं। आमतौर पर लेनदेन बिना किसी परेशानी के पूरा हो जाता है, लेकिन कभी-कभी तकनीकी गड़बड़ी, नेटवर्क की समस्या या बिजली बाधित होने के कारण ऐसी स्थिति बन जाती है कि खाते से राशि कट जाती है, जबकि मशीन से नकद नहीं निकलता। ऐसी घटना होने पर स्वाभाविक रूप से ग्राहक चिंतित हो जाता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय नियम ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हैं और निर्धारित प्रक्रिया अपनाने पर फंसी हुई राशि वापस मिल सकती है।

सबसे पहले शिकायत दर्ज कराना जरूरी
यदि एटीएम से नकद नहीं निकला है, लेकिन खाते से राशि डेबिट हो गई है, तो सबसे पहले संबंधित लेनदेन का प्रमाण सुरक्षित रखें। यदि मशीन से ट्रांजैक्शन स्लिप मिली है तो उसे संभालकर रखें। स्लिप उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बैंक से प्राप्त SMS, मोबाइल बैंकिंग एंट्री या ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखना उपयोगी रहेगा। इसके बाद उसी बैंक के कस्टमर केयर नंबर या एटीएम पर दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर दर्ज की गई शिकायत आगे की प्रक्रिया को आसान बनाती है।
आरबीआई के नियम क्या कहते हैं
भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि एटीएम लेनदेन असफल रहता है और ग्राहक के खाते से राशि कट जाती है, तो बैंक को शिकायत प्राप्त होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर समस्या का समाधान करना होता है। मौजूदा व्यवस्था में कई मामलों में ऑटो-रिवर्सल सिस्टम के कारण राशि 24 घंटे के भीतर ही ग्राहक के खाते में वापस आ जाती है। यदि ऐसा नहीं होता, तब भी बैंक को अधिकतम पांच कार्य दिवस के भीतर संबंधित राशि ग्राहक के खाते में जमा करनी होती है।
देरी होने पर मुआवजे का भी प्रावधान
यदि बैंक तय समय सीमा के भीतर राशि वापस नहीं करता, तो ग्राहक को केवल मूल राशि ही नहीं बल्कि नियमानुसार मुआवजा भी मिलने का अधिकार है। आरबीआई के नियमों के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के पांच कार्य दिवस बाद भी भुगतान लंबित रहने पर बैंक को प्रत्येक अतिरिक्त दिन के लिए 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति देनी होती है। यह व्यवस्था ग्राहकों के हितों की सुरक्षा और बैंकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।
समस्या का समाधान न होने पर आगे क्या करें
यदि बैंक या कस्टमर केयर से संपर्क करने के बावजूद एक महीने तक शिकायत का समाधान नहीं होता, तो ग्राहक मामले को आगे बढ़ा सकता है। ऐसी स्थिति में आरबीआई के Complaint Management System के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है। शिकायत की समीक्षा के बाद संबंधित प्राधिकरण मामले की जांच करता है और आवश्यक होने पर बैंक को नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाते हैं।
ग्राहकों के लिए उपयोगी सावधानियां
एटीएम से लेनदेन करते समय कुछ सावधानियां अपनाना भविष्य में होने वाली परेशानी से बचा सकता है। ट्रांजैक्शन पूरा होने तक एटीएम स्क्रीन पर दिखाई देने वाले संदेश को ध्यान से देखें और जल्दबाजी में मशीन न छोड़ें। मोबाइल पर आने वाले बैंक अलर्ट को सुरक्षित रखें तथा किसी भी असफल लेनदेन की सूचना तुरंत बैंक को दें। इसके अलावा शिकायत संख्या या रेफरेंस नंबर अवश्य नोट कर लें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसकी मदद से शिकायत की स्थिति की जानकारी ली जा सके।
एटीएम से नकद न निकलने की स्थिति असुविधाजनक जरूर होती है, लेकिन आरबीआई के नियम ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। सही समय पर शिकायत दर्ज करना, लेनदेन का प्रमाण सुरक्षित रखना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना राशि वापस मिलने की संभावना को आसान बनाता है। यदि बैंक तय समय में कार्रवाई नहीं करता, तो ग्राहक के पास नियामकीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराने और मुआवजा प्राप्त करने का भी अधिकार मौजूद है।