TradeDeal – भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता लागू, कई क्षेत्रों के लिए खुले नए अवसर
TradeDeal– भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) बुधवार से प्रभावी हो गया। इसे हाल के वर्षों में भारत के सबसे महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों में गिना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस समझौते से कृषि, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), निर्यात कारोबार और निवेश गतिविधियों को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लागू होने वाला यह छठा मुक्त व्यापार समझौता है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।

व्यापार और निवेश को मिलेगा नया आधार
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता केवल आयात शुल्क में कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं, सरकारी खरीद और तकनीकी सहयोग सहित कई क्षेत्रों को शामिल करता है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इसे भारत के वैश्विक व्यापार विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और उद्योगों के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार के मुताबिक, इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त या रियायती पहुंच प्राप्त होगी। इससे वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, कृषि आधारित वस्तुएं, इंजीनियरिंग सामान और अन्य निर्यात क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है। वहीं, ब्रिटेन से आने वाले कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम होने से भारतीय उपभोक्ताओं को भी कुछ वस्तुएं अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं।
कई क्षेत्रों को मिलेगा विस्तार का अवसर
CETA के तहत डिजिटल व्यापार, निवेश, बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद, श्रम, पर्यावरण, सेवा क्षेत्र और MSME से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। समझौते में कुल 30 अध्याय हैं, जिन्हें भारत के सबसे व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। इसके अलावा पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की बड़ी सार्वजनिक निविदाओं में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा, जिससे बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा और परिवहन परियोजनाओं में सहयोग बढ़ने की संभावना है।
कुछ उत्पादों पर शुल्क में होगी कमी
समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की सहित कुछ प्रीमियम विदेशी उत्पादों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। वहीं, ब्रिटेन में निर्मित कारों और ट्रकों के आयात पर भी सीमा शुल्क धीरे-धीरे घटाया जाएगा। हालांकि इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों के लिए रियायतें निर्धारित समयावधि के बाद लागू होंगी, ताकि घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग को शुरुआती वर्षों में प्रतिस्पर्धात्मक सुरक्षा मिल सके।
संवेदनशील वस्तुओं को रखा गया बाहर
दोनों देशों ने कुछ संवेदनशील उत्पादों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है। भारत ने सेब, अखरोट, कुछ बीज, व्हे, सोने की ईंटों और स्मार्टफोन जैसे उत्पादों पर शुल्क रियायत नहीं दी है। वहीं ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी और कुछ मांस उत्पादों को इस व्यवस्था में शामिल नहीं किया है। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादकों के हितों की रक्षा करना बताया गया है।
पेशेवरों और उद्योगों को भी राहत
समझौते के साथ लागू डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन में कार्यरत कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्ष तक वहां सोशल सिक्योरिटी अंशदान से छूट मिलेगी। इससे विशेष रूप से आईटी, तकनीकी सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों और कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ रोजगार और निवेश के अवसर भी बढ़ाएगा।