CorianderChutney – इस विधि से बिना मिक्सर और सिलबट्टे के भी तैयार करें देसी स्वाद वाली चटनी
CorianderChutney- धनिया और टमाटर की ताजी चटनी भारतीय रसोई का ऐसा स्वाद है, जो लगभग हर क्षेत्र में अलग अंदाज से बनाई जाती है। कई घरों में आज भी इसे सिलबट्टे पर पीसकर तैयार किया जाता है, क्योंकि इस तरीके से चटनी का स्वाद और खुशबू अधिक प्राकृतिक मानी जाती है। हालांकि, आजकल ज्यादातर लोग सुविधा के लिए मिक्सर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर घर में सिलबट्टा या मिक्सर दोनों उपलब्ध न हों, तब भी कुछ आसान घरेलू तरीकों से उसी तरह की दरदरी और स्वादिष्ट चटनी बनाई जा सकती है।

चटनी तैयार करने के लिए किन चीजों की होगी जरूरत
इस चटनी के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। इसे बनाने के लिए 3 से 4 पके हुए टमाटर, ताजी हरी धनिया, 2 से 3 लहसुन की कलियां, 2 हरी मिर्च और स्वादानुसार नमक पर्याप्त हैं। चाहें तो स्वाद के अनुसार थोड़ा सा नींबू का रस भी मिलाया जा सकता है। सभी सामग्री को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।
मिक्सर से चटनी बनाने का आसान तरीका
यदि जल्दी में चटनी तैयार करनी हो, तो सभी सामग्री को छोटे टुकड़ों में काटकर मिक्सर जार में डालें और जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी मिलाएं। इसके बाद 30 से 60 सेकंड तक पीस लें। कुछ ही मिनटों में चटनी तैयार हो जाएगी। हालांकि, इस तरीके से बनी चटनी का टेक्सचर काफी महीन होता है, जबकि पारंपरिक तरीके से तैयार चटनी में हल्की दरदराहट बनी रहती है, जिसे कई लोग अधिक पसंद करते हैं।
सिलबट्टे पर तैयार चटनी का अलग स्वाद
पारंपरिक तरीके से चटनी बनाने के लिए टमाटर, हरी धनिया, लहसुन और हरी मिर्च को बारीक काट लें। इसके बाद इन्हें सिलबट्टे पर धीरे-धीरे पीसें। इस प्रक्रिया में सामग्री पूरी तरह महीन नहीं होती, बल्कि हल्की दरदरी रहती है, जिससे चटनी का स्वाद और सुगंध अलग महसूस होती है। कई परिवार आज भी इसी विधि को सबसे बेहतर मानते हैं।
बिना मिक्सर और सिलबट्टे के भी बन सकती है चटनी
अगर घर में मिक्सर या सिलबट्टा उपलब्ध नहीं है, तो भी चटनी बनाना मुश्किल नहीं है। इसके लिए सभी सामग्री को बारीक काटकर किसी मजबूत स्टील के बर्तन, ओखली या मोटे गिलास में डालें। फिर मूसल या बेलन की सहायता से अच्छी तरह कूट लें। इस प्रक्रिया से सामग्री अच्छी तरह मिल जाती है और चटनी का टेक्सचर पारंपरिक शैली जैसा बना रहता है। आखिर में स्वादानुसार नमक मिलाकर इसे दाल-चावल, रोटी, पराठे या नाश्ते के साथ परोसा जा सकता है।
पारंपरिक तरीके क्यों आज भी पसंद किए जाते हैं
खाना बनाने के जानकारों का मानना है कि हाथ से कूटी या सिलबट्टे पर पीसी गई चटनी में सामग्री का प्राकृतिक स्वाद और खुशबू अधिक बनी रहती है। इसमें अत्यधिक महीन पेस्ट नहीं बनता, जिससे हर सामग्री का अलग स्वाद महसूस होता है। यही वजह है कि आधुनिक उपकरणों के बावजूद कई लोग आज भी पारंपरिक तरीकों से बनी चटनी को प्राथमिकता देते हैं।