स्वास्थ्य

SleepResearch – पर्याप्त नींद की कमी से बढ़ सकता है वजन, अध्ययन में सामने आई अहम जानकारी

SleepResearch- अगर आप वजन नियंत्रित रखने के लिए खानपान और नियमित व्यायाम पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन रोजाना पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं, तो आपकी कोशिशों का असर कम हो सकता है। हाल में प्रकाशित एक शोध में संकेत मिले हैं कि लगातार कम समय तक सोने की आदत शरीर के वजन और समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद केवल थकान दूर करने के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर के संतुलित कामकाज के लिए भी जरूरी है।

शोध में क्या सामने आया

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किए गए अध्ययन में पाया कि जिन प्रतिभागियों की नींद लगभग छह सप्ताह तक प्रतिदिन औसतन 80 मिनट कम रही, उनके वजन में करीब एक पाउंड यानी लगभग 450 ग्राम तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों की नींद, दैनिक गतिविधियों और शरीर में होने वाले बदलावों का नियमित विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि शुरुआती स्तर पर यह बढ़ोतरी मामूली दिख सकती है, लेकिन यदि लंबे समय तक नींद की कमी बनी रहे तो मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।

नींद की कमी वजन को कैसे प्रभावित करती है

विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में भूख और तृप्ति को नियंत्रित करने वाले हार्मोन का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसके कारण व्यक्ति को सामान्य से अधिक भूख लग सकती है और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा भी बढ़ सकती है। लगातार ऐसा होने पर वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

शारीरिक सक्रियता भी हो सकती है कम

अध्ययन में यह भी देखा गया कि कम सोने वाले लोग दिनभर अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहे। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तब थकान के कारण चलना-फिरना और शारीरिक गतिविधियां कम हो सकती हैं। इसका सीधा असर कैलोरी खर्च होने की प्रक्रिया पर पड़ता है, जिससे वजन नियंत्रित रखना कठिन हो सकता है।

मेटाबॉलिज्म और स्वास्थ्य पर असर

शोधकर्ताओं का कहना है कि लगातार नींद की कमी शरीर की ऊर्जा उपयोग करने की प्राकृतिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है। इससे मेटाबॉलिज्म की कार्यक्षमता कम हो सकती है और वजन घटाने की गति धीमी पड़ सकती है। यही कारण है कि पर्याप्त नींद को संतुलित जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

अन्य स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ सकते हैं

अध्ययन में यह भी संकेत मिला कि लंबे समय तक कम नींद लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने का जोखिम हो सकता है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज की संभावना बढ़ा सकता है। इसके अलावा हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसलिए नियमित और पर्याप्त नींद को स्वस्थ जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा मानते हैं।

स्वस्थ वयस्कों को कितनी नींद लेनी चाहिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की नींद उपयुक्त मानी जाती है। नियमित रूप से इससे कम सोने की आदत शरीर के कई महत्वपूर्ण तंत्रों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए नींद की गुणवत्ता और अवधि दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।

बेहतर नींद के लिए अपनाए जा सकते हैं ये उपाय

अच्छी नींद के लिए रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की आदत विकसित करना फायदेमंद माना जाता है। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या अन्य स्क्रीन का उपयोग सीमित रखें। शाम के बाद कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन कम करें और सोने का वातावरण शांत व आरामदायक बनाए रखें। नियमित व्यायाम भी बेहतर नींद और संतुलित वजन बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

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